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Uncategorized – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव https://vananchal24tvlive.com बस देखते रहिये... Sat, 05 Sep 2026 14:27:46 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://vananchal24tvlive.com/wp-content/uploads/2022/08/cropped-logo_1x1-32x32.jpg Uncategorized – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव https://vananchal24tvlive.com 32 32 जमशेदपुर : विद्यार्थियों ने ऐक्सल टेक्निकल इंस्टीट्यूट धातकिडीह के शिक्षकों को सम्मानित किया  https://vananchal24tvlive.com/jamshedpur-students-honored-the-teachers-of-axel-technical-institute-dhatkidih/ Sat, 05 Sep 2026 14:27:46 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79668 जमशेदपुर : विद्यार्थियों ने ऐक्सल टेक्निकल इंस्टीट्यूट धातकिडीह के शिक्षकों को सम्मानित किया

रिपोर्ट : अभिजीत सेन

भारत के पूर्व सह द्वितीय राष्ट्रपति सह प्रख्यात शिक्षाविद, महान विचारक, एवं भारत रत्न से सम्मानित, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जयंती, जिसे शिक्षक दिवस के रूप में मान्यता दिया गया. इस दिन यानी 5 सितंबर को बड़े गर्व एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।. वहीं जमशेदपुर के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक ऐक्सल टेक्निकल इंस्टीट्यूट धातकिडीह के संस्थापक मोहम्मद राशिद आलम के अगुवाई में, भारतवर्ष के कोने-कोने से आए विद्यार्थियों के बीच डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन करते हुए, शिक्षक दिवस को शिक्षा के जरिए संस्कार में तब्दील करने वाला इस पावन दिन पर वहां के सभी शिक्षकों को विद्यार्थियों के द्वारा केक कटिंग करने के पश्चात सभी को सम्मानित किया गया। शिक्षकों के रूप में निदेशक मोहम्मद राशिद आलम, मोहम्मद शब्बीर, अरिजीत सरकार, मोहम्मद शाहब, दिलीप, दुर्जय लाल, माधव, कार्यालय सहायक के रूप में सुश्री काजल, रश्मि, हीना, इरम, ब्यूटी, सोनम. उपस्थित रहे। इस दौरान प्रखर वक्ता सह शिक्षक के रुप में मोहम्मद राशिद एवं मोहम्मद शब्बीर ने बताया आज के समय जो विद्यार्थी टूट गये है, उसे जोड़ों, फिर उसे बनाओं. सेफ्टी फर्स्ट एड एवं डिजास्टर मैनेजमेंट इमरजेंसी प्रीपेयाडनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम के अरिजीत सरकार ने बताया कि आज का दिन तो हम सबों के लिए गर्व का दिन है. जहां हम सभी मिलकर प्रख्यात शिक्षाविद पूर्व एवं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति सह भारत रत्न से सम्मानित डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को उनके जयंती पर नमन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है. वहीं अपने गुरु से लिया गया शिक्षा को हम किस तरह से अधिक से अधिक विद्यार्थियों के बीच प्रचार प्रसार कर सके, एवं एक शिक्षक एवं विद्यार्थियों के बीच जो एक अनोखा नाता बनता है उसको और किस तरह से मानव प्रेम के अटूट धागे के बंधन में बांधा जाए , ताकि आज के युवाओं को सही मार्गदर्शन मिल सके एवं सही रास्ते पर अग्रसर होता रहे. यही आज के दिन का मूल उद्देश्य है।

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पोटका : उच्च विद्यालय डालसा ने बच्चों को पॉक्सो एक्ट के बारे में बताया गया https://vananchal24tvlive.com/potka-students-at-dalsa-high-school-were-informed-about-the-pocso-act/ Sat, 05 Sep 2026 10:20:46 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79648 पोटका : उच्च विद्यालय डालसा ने बच्चों को पॉक्सो एक्ट के बारे में बताया गया

रिपोर्ट : अभिजीत सेन

उच्च विद्यालय गीतिलता में डालसा ने दी विधिक जानकारी बच्चों को पॉक्सो एक्ट के बारे में बताया गया ।

डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के निर्देशानुसार मनोज कुमार (LADC.jsr) के द्वारा विद्यार्थियों को दी गई विधिक जानकारी सर्व प्रथम डालसा के गठन उसके कार्य और उद्देश्य से बच्चों को अवगत कराया गया।

हमारे देश के संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों,गुड टच बेड टच, शिक्षा के अधिकार, पॉक्सो एक्ट के बारे में बताते हुए कहा गया कि, अगर किसी नाबालिग बच्चों के ऊपर कोई यौन अपराध होता है तो (लैगिंक अपराधों से बच्चों की संरक्षण अधिनियम 2012) के तहत दोषी को उसके कु कृत्य के अनुसार तीन साल कारावास से ले कर आजीवन कारावास या मृत्युदंड भी देने का प्रावधान है। ऐसी मामलों की सुनवाई जल्दी होती है और ये गैर जमानत मामलें हैं।वर्षों से हमारे समाज में पल रहे अंधविश्वास, डायन प्रथा, बाल विवाह, बाल मजदूरी, नशा मुक्ति, मानव तस्करी, साइबर क्राइम आदि के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही स्पॉनशरसिफ, शिशु प्रोजेक्ट, पीड़ित मुआवजा योजना, नालसा का निःशुल्क कानूनी सलाह परामर्श के लिए हेल्पलाइन नंबर 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, पुलिस सेवा 100/112,महिला उत्पीड़न के 181, साइबर सेल 1930 हेल्पलाइन नंबर साझा की गई एवं जरूरत पड़ने पर इन नंबरों से मदद लेने के लिए कहा गया। गीतिलता गांव में भी पहुंच कर डालसा की टीम ने ग्रामीणों को जागरूक करने का काम किया। एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में जानकारी दिया।मौके पर मनोज कुमार (LADC.jsr) विद्यालय के प्रधान अध्यापक नील मोहन भंज एवं ग्रामीणों में पंचायत समिति सदस्य चरण सिंह, जमशेदपुर के पी एल वी अरुण रजक, सुजय दत्ता, बालेश्वर दास साथ में पोटका के पी एल वी चयन कुमार मंडल, डोबो चकिया, छाकु माझी, ललिता पुरान, मीरा मंडल, दुलाल चंद्र मंडल, सबिता सोरेन, कुरुमीता मुर्मू आदि उपस्थित थे।

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चांडिल : अपने बचे कुचे वजूद बचाने के लिए सड़कों पर उतरे चांडिल डैम के विस्थापित https://vananchal24tvlive.com/chandil-displaced-people-from-the-chandil-dam-project-have-taken-to-the-streets-to-save-their-remaining-existence/ Tue, 25 Aug 2026 17:29:26 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79431 चांडिल : अपने बचे कुचे वजूद बचाने के लिए सड़कों पर उतरे चांडिल डैम के विस्थापित

दीपक नाग …✍

२५, अगस्त’ २०२६ : झारखंड सरकार मुल वासी और आदिवासीयों के हित में बातें तो करतें हैं पर धरातल में हकीकत क्या ब्यां कर रहा है, इसे वहीं समझ सकते हैं जो करीब और गहराई तक जाकर बातों को समझने की कोशिश की है। इसे जानने के लिए हम पुरे प्रदेश की बातें तो बता नहीं सकते हैं, पर झारखंड राज्य के सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखण्ड स्थिति चांडिल डैम के विस्थापितों के परेशानी पर बातें कर सकतें हैं। जानने के लिए यात्रा किजिए मेरे साथ।

वैसे तो लगभग पीछले पचास सालों से चांडिल डैम के विस्थापितों के आंदोलन का इतिहास रहा है। अविभाजित बिहार ने हरित क्रांति की सोच बनाई और हजारो लोग सैकड़ों परिवार के घर-जमीन एक के बाद एक गांव जलमग्न होता गया। परिवार सड़कों पर आ गया। सरकार ने विस्थापितों के लिए विस्थापित नीति बनाई। नीतिओं में कुछ कम-बेसी होने के कारण विस्थापितों के मन में व्यवस्था तंत्रों के प्रति असंतोष व्याप्त रहा। और समय के अंतराल मे असंतोष बढ़ता गया। विस्थापितों का माने तो व्यवस्था तंत्रों के एक अधिकारी से लंबे आलोचना के बाद कुछ आशा बनने के पहले ही अधिकारीयों का तबादला होने से आशा अनुकूल कार्य आज तक नहीं हो सका।

बहरहाल, समय – समय पर विस्थापित अपने विभिन्न मांगों को लेकर एड़ी-चोटी रगड़ते रहें। अंततः विस्थापितों ने मिल कर “चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच” का गठन किया। जिसमें कुल दस मांगों को रखा गया है –

१. विस्थापन आयोग को शीघ्र चालू किया जाए।

२. विस्थापितों के लिए सरकार अविलंब पुनर्वास पैकेज आरंभ करें।

३. अवसर प्राप्त कर्मचारियों के रिक्त पदों को अविलंब भरा जाए।

४. पालिटेक्निक संस्थानो में विस्थापितों के परिजनों को पचास प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।

५. पुनर्वास कार्यालयों भ्रष्टाचार मुक्त और जबाबदेह बनाएं।

६. चांडिल डैम के भंडारित जल में मत्स्य पालन का धिकार विस्थापितों को दिया जाए।

७. पुनर्वास स्थलों का भूमि पट्टा विस्थापितों को दीया जाए।

८. चांडिल डैम में नौका विहार के अलावा अन्य आर्थिक रोजगारों का अधिकार विस्थापितों को दिया जाए।

९. लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से चांडिल डैम का पानी किसान के खेतों तक पहूचाने की व्यवस्था किया जाए।

१०. पुनर्वास, रोजगार और मुआवजा से जुड़े मामलों को  अविलंब निपटारा किया जाए।

बता दूं कि, आम तौर पर चांडिल के विस्थापितों के पुनर्वास नीति के तहत पुरी प्रतिक्रियाएं अभी तक आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। अपने ही राज्य में अपरिचित का संज्ञा देकर जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य है। अभी तक पुनर्वास नीति के तहत पुनर्वास स्थल का भुमि पट्टा नहीं दिया गया है।

औसतन विस्थापितों का जीविका निर्वाह डैम के जलासय में मत्स्य पालन और पर्यटकों को नौका विहार पर आश्रित है। विस्थापितों के प्रतिनिधित्व करने वाले श्यामल मार्डी का कहना है कि, झारखंड राज्य के पर्यटन मंत्रालय ने इसका टेंडर निकाल कर किसी बाहरी ठेकेदार को देने की कोशिश करके विस्थापितों के रोजी-रोटी पर प्रहार करने की कोशिशें की जा रही है। उन्होंने कहा, घर-द्वार और जमीं हमने खोया है। देखा जाए तो हम चांडिल डैम के विस्थापित कायदे से कानून पता विहिन है। हमारे वजूद पुरी तरह मिटाने की कोशिश किया जा रहा है। हम जान दे देंगे पर झुकेंगे नहीं। श्यामल मार्डी ने कहा, विस्थापितों मे अधिकांश संथाली आदिवासी और मुल वासी हैं। जल, जंगल और जमीन पर हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।

बहरहाल, चांडिल डैम के विस्थापितों का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। प्रभावित परिवार के जीवन यापन करने वाले इलाकों में मुख्य रूप से अंबिका यादव, विवेक सिंह, बाबु, श्यामल मार्डी, राकेश रंजन, कार्तिक कालिंदी, संजीव यादव, किरण हेम्ब्रम,होगा माझि, गुरु चरन टुडू जन जागरण अभियान चलाया। यह जागरूकता अभियान 27 अगस्त’ 2026 तक चलाया जाएगा। समय रहते हेमंत सरकार को इनके बातों पर विचार करना लाजिमी होगा।

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घाटशिला : जातिसूचक टिप्पणी के आरोप को मो. जावेद ने बताया झूठा और ग़लत बताया https://vananchal24tvlive.com/ghatshila-md-javed-dismissed-the-allegation-of-making-a-casteist-remark-as-false-and-baseless/ Sat, 22 Aug 2026 17:34:29 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79399 घाटशिला : जातिसूचक टिप्पणी के आरोप को मो. जावेद ने बताया झूठा और ग़लत बताया

पिछले दिनों हुए एक कथित रुप से मोहम्मद जावेद और घाटशिला अंचल निरीक्षक (सीआई) के बीच कि विवाद सामने आया है। इस मामले में घाटशिला अंचल निरीक्षक (सीआई) के द्वारा भारतीय वायुसेना के एक्स वारंट ऑफिसर एवं शौर्य चक्र से सम्मानित मो. जावेद पर जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और मारपीट का आरोप लगाया गया है।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मो. जावेद ने इसे पूरी तरह झूठा और निराधार कहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है। मो. जावेद ने कहा कि इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सीआई का नाम तक उन्हें मालूम नहीं है, उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घाटशिला अंचल निरीक्षक का नाम तक उन्हें ज्ञात नहीं है और यही कारण है कि पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में भी उन्होंने सीआई का नाम नहीं लिखा है। ऐसे में उनके खिलाफ जातिसूचक एवं अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष भारतीय वायुसेना में देश की सेवा करते हुए बिताए हैं। देश के प्रति उनकी सेवा और वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय वीरता सम्मान से सम्मानित किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्षों तक सेना के अनुशासन और देशसेवा में जीवन बिताने वाला व्यक्ति किसी के साथ जातिसूचक टिप्पणी या मारपीट जैसा व्यवहार क्यों करेगा। मो. जावेद ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद जिस व्यवस्था से उन्हें न्याय की उम्मीद है, उसी व्यवस्था में बार-बार उनके खिलाफ ही रिपोर्ट तैयार करने की बातें सुनी जा रही है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, सीपीग्राम पोर्टल, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कोल्हान आयुक्त, पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त और एसएसपी तक शिकायत करने के बावजूद अंततः रिपोर्ट उन्हीं अधिकारियों या व्यवस्था से संबंधित लोगों द्वारा तैयार की जाती है, जिनके खिलाफ उन्होंने शिकायत की है। उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच होने पर ही न्याय की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह अपने साथी पूर्व सैनिकों के साथ राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। जरूरत पड़ने पर वह अपना शौर्य चक्र वापस करने और झारखंड छोड़ने जैसे कठोर कदम उठाने के लिए भी मजबूर हो सकते हैं।

शनिवार को पूर्व सैनिक-अर्द्धसैनिक संगठन घाटशिला के संख्या में सदस्य और क्षेत्र के अन्य नागरिक अनुमंडल कार्यालय पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल घाटशिला एसडीओ से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करने पहुंचे थें। एसडीओ के कार्यालय में अनुपस्थित रहने के कारण प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय कर्मी को मांगपत्र सौंपा।

मांगपत्र के माध्यम से मो. जावेद के खिलाफ लगाए गए कथित झूठे आरोपों को तत्काल हटाने तथा मामले में दोषी लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्र के बुद्धिजीवी, सामाजिक रूप से सम्मानित नागरिक और सेना मेडल से सम्मानित पूर्व सैनिक भी शामिल थे। संगठन के सदस्यों ने कहा कि देश की सेवा कर चुके सैनिक और राष्ट्रीय वीरता पदक से सम्मानित व्यक्ति के सम्मान और मर्यादा की रक्षा होनी चाहिए।

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मुसाबनी: राजनितिक दलों के नेता खुद मे है मश्गूल, बेरोजगार दाने-दाने पर है मोहताज https://vananchal24tvlive.com/musabani-political-leaders-are-engrossed-in-their-own-affairs-while-the-unemployed-are-struggling-for-their-very-next-meal/ Fri, 21 Aug 2026 11:17:17 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79344 मुसाबनी: राजनितिक दलों के नेता खुद मे है मश्गूल, बेरोजगार दाने-दाने पर है मोहताज 

दीपक नाग… ✍

२१, अगस्त : हिन्दुस्तान कापर लिमिटेड/आर. के. रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड सुरदा खनन इकाई में मजदूरों के बहाली को लेकर हो रही गड़बड़ियों को लेकर पुर्वी मुसाबनी पंचायत के बेरोजगार गोल बंद होने लगें। इन लोगों का कहना है कि, सुरदा में चल रहे उत्पादन कार्य के लिए क्षेत्र के बेरोजगारों को काम पर रखा जा रहा है। जिसके लिए पंचायत स्तर से विधिवत रुप से ग्राम सभा का आयोजन किया जाना है। पर पुर्वी मुसाबनी पंचायत के मुखिया और ग्राम प्रधान ने विधिवत तरीके से कोई जानकारी दिए बगैर सभा आयोजन दिखा दिया है । पंचायत के सभी लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

 इसके विरोध में दर्जनों भर गांव वासियों ने लिखित शिकायत मुसाबनी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपा। प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व चन्दन शर्मा, ओंकार सिंह और पिटर राज ने किया । आवेदन का प्रतिलिपि अंचलाधिकारी (मुसाबनी), अनुमंडल पुलिस अधिक्षक (मुसाबनी), अनुमंडलाधिकारी (घाटशिला) तथा आर. के. रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड सुरदा खनन इकाई प्रबंधन को सौंपा। 

आवेदन के माध्यम से आग्रह किया गया कि, पुर्वी मुसाबनी पंचायत के मुखिया और ग्राम प्रधान के द्वारा जिस बैठक का प्रस्ताव संबंधित विभाग को सौंपा गया है उसकी जांच कराया जाए और नये सीरे से विधिवत तरीके से ग्राम सभा बुलाया जाए।

पुरे देश के हर राज्यों में बेरोज़गारी का ग्राफ तेजी से बढ़ती जा रही है। रोजी-रोटी के तलाश में आये दिन दुसरे राज्यों में पलायन जारी है। जिन राज्यों से जितना अधिक पलायन का अर्थ है वह राज्य जरूरत के अनुशार रोजगार देने में असफल रहा है। झारखंड राज्य भी इस दौड़ में किसी से पीछे नहीं है। दो दशकों बाद जब सुरदा के बंद पड़ा खदान को प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से आरंभ किया गया तो जाहिर है प्रत्येक बेरोजगार नौजवानों के चेहरों में एक आशा की किरण जगी।

खबरों के अनुसार मजदूरों के इस बहाली में प्रारंभ से ही दलाली करण हावी रहा है। जिनका राजनितिक अच्छी पैठ है उन्हें मुफ्त में सुरदा खनन कार्यों में काम मिल गया । दुसरी तरफ कथित दलाल मोटा पैसे लेकर युवकों को कम दिलाता रहा। चर्चा है कि, दलाली का यह रकम चालिस – पचास हजार रुपए तक होता है। चर्चा में यह भी है कि, जिन लोगों का पैरवी चलता है वैसे लोग इस रेकेट में शामिल हैं। इनमें राजनीतिक और गैर राजनीतिक बंदा कोई भी है सकता है। आखिर मुसाबनी क्षेत्र में साधारण मजदूर का काम को लिए इतनी मारा-मारी क्यों है? इसे जानने के लिए ढाई दशक पीछे फ्लेस बैक को समझना जरूरी है। कहते हे कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लोग यहां के खदानों में अपना सेवा प्रदान करते थें। जिस कारण मुसाबनी के लोगों को अनेक राज्यों की भाषाएं काफी हद तक समझने और बोलना आता था। यूं कहिए कि, भारत मे एक “छोटा सा हिन्दुस्तान” मुसाबनी के वादियों में अहसास किया जाता था।

हिन्दुस्तान कापर लिमिटेड/इंडियन कापर कांप्लेक्स मुसाबनी ग्रुप आफ माइंस उपक्रम 1996 तक एक खुशहाल छोटा सा कस्बा हुआ करता था। मुसाबनी ग्रुप आफ माइंस के छः तांबें के खदानें (बानालोपा, मुसाबनी, बादिया, साऊथ सुरदा, केंदाडिह और राखा) चला करता था। हजारों नर-नारी इसमें स्थाई कामगार हुआ करता था। तब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था। केंद्र में कांग्रेस और प्रदेश (बिहार) में लालू प्रसाद यादव का जनता दल शासन किया करता था। 1996 के मध्य शनिवार के दिन सबेरे छः बजे के पाली मे अपने कार्य पर योगदान देने वाले कर्मचारियों ने देखा कि, बानालोपा माइन के नोटिस बोर्ड में बादिया माइन लगातार नुकसान के कारण बंद कर दिया जाएगा, इसे क्लोजर नोटिस के नाम से जाना जाता है। खदान बंद करने का तिथि क्लोज नोटिस में दे दिया गया था। यह बात जंगल की आग की तरह फ़ैल गई। तत्कालीन अपोजिशन के मजदूर संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया और इस क्लोजर नोटिस में एक छेद ढूंढने में सार्थक हुए। इसी आधार पर लेवर कोर्ट में अपील दायर कर तत्काल के लिए कंपनी प्रबंधन का यह पहला क्लोज़र नोटिस को खारिज कर दिया। पर खतरा अभी टला नहीं था। कुछ महीने बाद कंपनी प्रबंधन ने अपने गलतीयो को सुधार कर दुसरा, तीसरा … क्लोजर नोटिस निकलता गया और एक के बाद एक खदानें बंद होती चली गई। और वर्ष 2000 तक यह “छोटा सा हिन्दुस्तान” अंधेरों में गुम हो गया ।

आज मुसाबनी में बेरोज़गारी का मिशाल खड़ा है। राजनितिक दलों के अपने-अपने राजनिति चमकाने में मशगूल हैं। जब कि, बेरोजगार परिवार दाने-दाने पर मोहताज है।

बहरहाल, जिन विभागों को एक आशा और उम्मीदों के साथ पीड़ितों ने अपने परेशानी और दुःख व्यक्त किया, उन जिम्मेदार तंत्रों के खेमे में अब गेंद है कि, मामले को गहराई से ले या ठुकराए। यह एक यक्ष्य प्रश्न है।

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कांड्रा : अमलगम स्टील के गेट पर आश्रित परिवार का अनिश्चितकालीन धरना, अनुकंपा नौकरी की मांग https://vananchal24tvlive.com/kandra-family-of-a-deceased-employee-stages-indefinite-sit-in-at-amalgam-steel-gate-demanding-a-compassionate-appointment/ Thu, 20 Aug 2026 05:59:32 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79322 कांड्रा : अमलगम स्टील के गेट पर आश्रित परिवार का अनिश्चितकालीन धरना, अनुकंपा नौकरी की मांग

रिपोर्टर – जगबंधु महतो 

@ पांच दौर की वार्ता के बाद भी नहीं निकला समाधान, मृतक कर्मचारी के पुत्र ने प्रबंधन से लगाई न्याय की गुहार

@ क्षेत्र के पक्ष और विपक्ष राजनीतिक दलों की ओर से कोई पहल नहीं 

कांड्रा : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत कांड्रा स्थित अमलगम स्टील एंड पावर लिमिटेड के मुख्य गेट के समक्ष अनुकंपा के आधार पर स्थायी रोजगार की मांग को लेकर मृतक कर्मचारी के आश्रित परिवार ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। परिवार का कहना है कि कंपनी प्रबंधन के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद अब तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

धरने पर बैठे मनीमय महतो ने बताया कि उनके पिता अशोक कुमार महतो अमलगम स्टील एंड पावर लिमिटेड में डीआरआई लैब असिस्टेंट के पद पर स्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। फरवरी 2026 में उनके आकस्मिक निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। परिवार के भरण-पोषण का कोई स्थायी साधन नहीं होने के कारण उन्होंने कंपनी प्रबंधन से अनुकंपा के आधार पर रोजगार देने की मांग रखी है।

मनीमय महतो के अनुसार, पिता के निधन के बाद से इस मांग को लेकर कंपनी प्रबंधन के साथ करीब पांच बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन प्रत्येक बार बातचीत के बावजूद कोई सकारात्मक एवं ठोस निर्णय सामने नहीं आया। इससे निराश होकर परिवार ने अब कंपनी के मुख्य गेट के समक्ष शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चित कालीन धरना शुरू किया है।

मनीमय महतो ने स्पष्ट किया कि धरने का उद्देश्य कंपनी में किसी प्रकार का व्यवधान या अशांति पैदा करना नहीं है। परिवार केवल अपनी परिस्थितियों को प्रबंधन के सामने रखते हुए न्यायसंगत समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन मानवीय एवं पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनुकंपा के आधार पर स्थायी नौकरी देने की दिशा में सकारात्मक पहल करे।

आश्रित परिवार ने प्रबंधन से जल्द वार्ता कर मामले का समाधान निकालने की अपील की है, ताकि परिवार को आर्थिक संकट से उबरने का सहारा मिल सके।

बहरहाल, खुद को समाजसेवी समझने वाले कोई राजनितिक चेहरा इस मामले को लेकर अब तक अपने स्तर से पहल करते नहीं देखा गया। जाहिर है, गरीब की लड़ाई है, खुद ही लड़ना होगा।

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RANCHI : झारखंड राज्य का दिशा क्या होना ना और दशा क्या हो रहा है ? https://vananchal24tvlive.com/ranchi-what-direction-should-the-state-of-jharkhand-be-taking-and-what-is-its-current-state/ Wed, 19 Aug 2026 17:53:52 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=79305 RANCHI : झारखंड राज्य का दिशा क्या होना ना और दशा क्या हो रहा है ?

दीपक नाग … ✍

19 अगस्त 2026 :

आज झारखंड एक आमिर राज्य है पर झारखंड के साधारण लोग गरीब क्यों? इस बात से हम इंकार नहीं कर सकते हैं। वर्ना, युवक-युवती रोजगार के लिए आज सरकार के खिलाफ कमर कसे सड़कों पर क्यों अड़े हुए हैं ? क्या यह दिन देखने के लिए झारखंड अलग राज्य की लड़ाईयां लड़ी गई थी ? यह प्रश्न हर एक उस राजनीतिक पार्टी की ओर इशारा कर रहा है जिन्होंने झारखंड अलग राज्य बनने के बाद सत्ता का सुख भोगा है।

झारखंड अलग राज्य ऐसे ही किसी ने आसानी से थाली में परोस कर नहीं दे दी। अलग राज्य के लिए लड़ाई लम्बे समय तक आंदोलन चलता रहा । लोगों की जानें गईं, घर-द्वार छोड़ें, अपने भविष्य को दांव पर लगाकर खुद को आंदोलन के ज्वाला पर झोंक दिया।‌ खनिज संपदा और भौगोलिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण राज्य है झारखंड। झारखंड आंदोलन के दौरान सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलनकारी समय-समय पर खनिज-पदार्थों का आर्थिक नाकेबंदी करते थें। झारखंड राज्य का खनिज संपदा, अन्य राज्यों में रोजगार श्रृजन करें और झारखंड की हालत एक जैसी बने रहे ! इन बातों को लेकर झारखंड आंदोलन का रफ्तार बड़ता गया। अंततः झारखंड को अलग राज्य का पहचान मिला और 15 नवंबर’ 2000 को “झारखंड अलगा राज्य” का स्थापना हुई।

समय-समय पर झारखंड राज्य का बागडोर अलग-अलग राजनितिक दलों को मिलता रहा। पर जिस सोच से झारखंड की लड़ाई लड़ी गई थी, धरातल में ऐसा कुछ भी हासिल नहीं हुआ। समस्याएं वहीं खड़ी है जहां पर 27 साल पहले खड़ी थी। समय के अंतराल में और भी विकराल रूप लेता गया। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? झारखंड के साधारण जनता जिन्होंने भरोसा के साथ सत्ता पर बैठाते रहें या जनप्रतिनिधि समुदाय ? झारखंड अलग राज्य बनने के पीछे उद्देश्यों को एक बार मुड़ कर देख लेना जरूरी था। बड़े-बड़े बातें करने वाले राजनेता समझते होंगें कि, जनता भुल गए हैं कि, झारखंड का दिशा क्या होना था और दशा क्या हुआ ? भ्रष्टाचार और बड़ता बेरोज़गारी का ग्राफ जैसे दंश झेलते-झेलते लोग परेशान होने लगे।

बहरहाल, चलते हैं वर्तमान में झारखंड के सबसे ज्वलंत मुद्दों पर। कुछ सप्ताह पहले दिल्ली के जंतर-मंतर में NEET UG परीक्षा में धांधली पर CJP का आंदोलन ने सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर दिया था। वैसे दुसरा एक आंदोलन रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में छात्रों एवं अभ्यर्थियों का धरना और आंदोलन 29 जुलाई 2026 को आरंभ हुई।

आंदोलित परिक्षार्थी ने सरकार पर आरोप लगाया कि, सफल परिक्षार्थी को रोक कर बैक-डोर से लाखों रुपए लेकर असफल परिक्षार्थी को नौकरी दिया गया। इन परिक्षाओं और बहाली को रद्द करने कू लिए शान्ति पूर्ण तरीके से प्रदर्शन आरंभ हुआ। JLKM के पदाधिकारी सह छात्र नेता देवेंद्र महतो इस आंदोलन को समर्थन देते हुए आमरण अनशन पर बैठे । इस बीच उनके तबियत काफी बिगड़ने लगी तो अस्पताल में दाखिल कराया गया ।

इस बीच अनेक तरह की बातें हुई। विधानसभा घेराव तक का कार्यक्रम युवक – युवतियों द्वारा चलाया गया। मामला  जंगल के आग की तरह पुरे देश में फैल गया। सोशल मीडिया के माध्यम से पल-पल की खबरें मेन स्ट्रीम मिडिया से ज्यादा तेज दौड़ने लगें। मानों ऐसा लगा जैसे दिल्ली जंतर-मंतर की चिंगारी रांची तक पहुंच गई।

अंततः सरकार को बैक-फुट में आना पड़ा और सरकार ने JSSC – CGL और 2014 के बाद से आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPL के माध्यम से ली गई 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसला लिया गया।

पर प्रदर्शनकारी सरकार के इन फैसलों को आधा-अधूरा मानते हैं। हेमंत सरकार मामले की जांच के लिए CID को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदर्शनकारि इसका विरोध में आज भी है और CID को हटाकर CBI से जांच कराने के बात पर अडिग है।

धरना-प्रदर्शन अब भी जारी है। इस पुरे घटना के परिपेक्ष्य में झारखंड लोकतांत्रिक खतियानी मोर्चा (JLKM) के कोल्हान प्रमंडल का वरिय उपाध्यक्ष माधव महतो वानांचल के पत्रकार को फोन पर बताया, CID राज्य सरकार के अधिनस्थ है इसलिए जांच CBI से करवाया जाए। महतो ने कहा यह जांच CBI से करवाए बिना पीड़ीत हिलने वाले नहीं है। पर्वत कभी हिलता है क्या ? उन्होंने ने आगे कहा, जिन लोगों ने खोया है, दर्द वहीं समझ सकते हैं। श्री महतो ने कहा, CBI से जांच होने पर भ्रष्टाचार के इस नदी में छुपे हुए बड़े-बड़े मगर मच्छों का चेहरा सामने आने की उम्मीद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कहा, CBI जांच करने पर एक फायदा यह हो सकता है कि, जहां भ्रष्ट लोगों का कलाई कसेगी वहीं सरकार के निर्णय से नौकरी जाने वाले सफल परीक्षार्थियों को बचाया जा सकता है। CBI कोई न कोई रास्ता निकाल सकता है। दुध का दुध और पानी का पानी अलग हो सकता है ।

माधव महतो ने एक बड़ा सवाल उठाया कि, इन परिक्षाओं के लिए ब्लैक लिस्टेड एजेंसी को किस-किस ने चयन करने के लिए पैरवी किया है ? इसके अलावा प्रस्ताव किसने रखा था और स्वीकृति किसने दी थी ? उन्होंने कहा, यहां पुरा सिस्टम ही फेल है। CBI से जांच करवाने से सरकार क्यों घबराए रहे हैं ? परिक्षार्थी, विद्यार्थी और आम लोगों को स्पष्ट समझ में आ रहा है कि, खेल कहां से खेला जा रहा है ?

खबरों के अनुसार, वैसे लोग जिन्होंने ने सरकार के निर्देश पर अपनी नौकरी से हाथ धोने के कतार में हैं, वे सारे हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उच्च न्यायालय के सहारा ले रहे हैं। जरुरत पड़ने पर मुख्य न्यालय तक भी जाने का मन बनाए हुए हैं।

बहरहाल, हेमंत सरकार के लिए राजनितिक अग्नि परीक्षा समान कह सकते है। आगे कुआं तो पीछे खाई जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। आरंभ से ही अगर नौकरी बहाली में हो रही घपले बाजी पर नकेल कसे होते तो आज यह दिन देखना न होता।

सवाल है कि, सरकार पीड़ितों के आवाज के साथ चलना पसंद करेंगे या दल का मन रखने ज्यादा सोच रखेंगे ? यह एक यक्ष्य प्रश्न है। राजनीतिक जीवन में कभी-कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जब नेताओं को राजनितिक अग्नि परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है।

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घाटशिला : 32 सालों तक भारतीय सेना में रहकर देश सेवा कर घर लौटे कैप्टन मानसिंह हेमब्रम… https://vananchal24tvlive.com/ghatshila-captain-mansingh-hembram-returned-home-after-serving-the-country-in-the-indian-army-for-32-years/ Sat, 01 Aug 2026 18:02:21 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=78752 घाटशिला : 32 सालों तक भारतीय सेना में रहकर देश सेवा कर घर लौटे कैप्टन मानसिंह हेमब्रम…

31 जुलाई’ 2026 : 

कैप्टन मानसिंह हेमब्रम 32 साल भारतीय सेना में कार्य करने के पश्चात 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद अपने घर घाटशिला वापस आए। कारगिल का लड़ाई में शामिल होने का मौका मिला था कैप्टन मानसिंह हेमब्रम को।

इस अवसर पर पूर्व सैनिक अर्धसैनिक सेवा परिषद के घाटशिला के सदस्य और परिवार के द्वारा उनका भव्य रूप से स्वागत घाटशिला रेलवे स्टेशन में किया गया। माल्यार्पण किया गया और उनके ग्राम फुलडुंगरी तक अंदर सहित पहुंचाया गया। इस अवसर पर स्वागत समारोह में झारखंड के सांस्कृतिक वाद्ययंत्रों के थाप कार्यक्रम को मनोरम किया।

उनका स्वागत अखिल भारतीय पूर्व सैनिक अर्धसैनिक सेवा परिषद के घाटशिला के अध्यक्ष कैप्टन धनों टुडू, साहब, सूबेदार मेजर लुगु बास्के, नायब सूबेदार गोविंद सोरेन, सूबेदार लखन मुर्मू, नायब सूबेदार सुशील मुर्मू, हवलदार गणेश मुर्मू, हवलदार सुरेश बास्के, हवलदार पुताई मुर्मू, प्रताप कुमार अधिकार, अशोक महाकुड, नारी शक्ति में हिसी टुडू, सुशीला बास्के, मोगली मुर्मू,, सक्रो मुर्मू मनोहर, पानो टुडू, लक्ष्मी मुर्मू और शौर्य चक्र विजेता वारंट ऑफिसर मो. जावेद उपस्थित थें। मोहम्मद जावेद ने मौके पर कैप्टन मानसिंह हेमब्रम को अपने संगठन के तरफ से बधाई दी और कहा प्रहरी सदैव प्रहरी होते हैं। पहले सीमाओं के प्रहरी का जिम्मेदारी पूर्वक निर्वाह किया और अब समाज के प्रहरी बन कर राष्ट्रहित में सदैव कार्य करेंगे।

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घाटशिला : बिजली समस्या को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय पांडेय ने सौंपा मांगपत्र  https://vananchal24tvlive.com/ghatshila-bjp-mandal-president-vijay-pandey-submits-a-memorandum-regarding-electricity-issues/ Mon, 20 Jul 2026 13:15:49 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=78374 घाटशिला : बिजली समस्या को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय पांडेय ने सौंपा मांगपत्र 

रिपोर्ट : दीपक नाग 

घाटशिला।भारतीय जनता पार्टी के घाटशिला मंडल की ओर से सोमवार को झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के कार्यपालक अभियंता को ज्ञापन सौंपकर प्रखंड क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं जनहित से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई। इस दौरान डुमरिया व दामपाड़ा मंडल की ओर से भी अलग-अलग मांगपत्र सौंपे गए।

भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय पांडेय ने बताया कि घाटशिला प्रखंड के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अनियमित बिजली आपूर्ति, जर्जर बिजली तार, क्षतिग्रस्त एवं झुके हुए पोल, ओवरलोड ट्रांसफार्मर तथा कम वोल्टेज जैसी समस्याओं से आम लोग लंबे समय से परेशान हैं। विशेषकर बरसात के मौसम में खुले एवं नीचे लटकते बिजली तारों के कारण करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है, जिससे लोगों एवं पशुओं की सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है।

भाजपा नेताओं ने 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, जर्जर तारों को बदलकर आधुनिक केबलिंग कराने, क्षतिग्रस्त व झुके हुए बिजली पोलों को बदलने, खराब एवं कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को पर्याप्त क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मरों से प्रतिस्थापित करने, जल-जमाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने, मुख्य सड़क, बाजार एवं चौक-चौराहों पर बेहतर विद्युत व्यवस्था एवं स्ट्रीट लाइट उपलब्ध कराने, ग्रामीण क्षेत्रों में कम वोल्टेज व बार-बार होने वाली बिजली कटौती का स्थायी समाधान करने की मांग की। साथ ही बिजली संबंधी शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए 24×7 कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने, जिन गांवों एवं मोहल्लों में पर्याप्त बिजली पोल, तार एवं केबलिंग नहीं है वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराने, विद्युत लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव कराने तथा बरसात एवं आपातकालीन परिस्थितियों में विशेष विद्युत मरम्मत दल की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई।

विजय पांडेय ने कहा कि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई होने से ही क्षेत्र की जनता को सुरक्षित, निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा उपलब्ध होगी तथा बरसात के मौसम में संभावित विद्युत दुर्घटनाओं पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

इस मौके पर भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष लखन मार्डी, घाटशिला के मंडल अध्यक्ष विजय पांडेय, मंडल प्रभारी विश्वनाथ बेहरा, दामपाड़ा के मंडल अध्यक्ष सौरव हांसदा, दीपक दंडपात, बसंत मदीना, दिलीप पंडा, विवेक महापात्र, गोविंदा बेहरा, मृत्युंजय दंडपात, विश्व मांझी, देवाशीष गिरी, दिलीप कुमार मुर्मू, बबलू हांसदा, लक्ष्मण हांसदा, भरत चंद्र भकत, भूदेव भकत, मुकेश भगत, गौरांगो नायक, काल्टू मन्ना समेत कई भाजपा नेता उपस्थित थे।

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जमशेदपुर : बिहड़ लखाईडिह के जंगलों में पारंपरिक हर्बल की खोज में IIT मुंबई से पहुंचे शोध कर्ता टीम https://vananchal24tvlive.com/jamshedpur-a-research-team-from-iit-bombay-has-arrived-in-the-remote-forests-of-lakhai-dih-in-search-of-traditional-herbal-remedies/ Sun, 12 Jul 2026 15:02:51 +0000 https://vananchal24tvlive.com/?p=78169 जमशेदपुर : बिहड़ लखाईडिह के जंगलों में पारंपरिक हर्बल की खोज में IIT मुंबई से पहुंचे शोध कर्ता टीम

प्रभाकर…✍

# डुमरिया की पारंपरिक हर्बल चिकित्सा पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन, लाखाईडिह पहुंचे वरिष्ठ शोधकर्ता

# झारखंड और उड़ीसा के तराई मे पहाड़ी पर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा छोटा सा है गांव लखाईडिह

# गांव के लोग नशा से कोशों दूर पर, औषधि ज्ञान से है भरपूर

12 जुलाई : पूर्वी सिंहभूम के आदिवासी बहुल डुमरिया प्रखंड के पहाड़ी पर बसा गांव लाखाईडिह में पारंपरिक हर्बल चिकित्सा और स्थानीय औषधीय वनस्पतियों के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है।

आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर और चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवतोष दत्ता ने गांव का दौरा कर ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू एवं ग्रामीणों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वर्षों से संरक्षित आदिवासी पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय पौधों के उपयोग से संबंधित जानकारी जुटाई।

इस दौरे के क्रम में वानांचल से अपनी बातें साझा करते हुए डॉ. दत्ता ने कहा, लाखाईडडिह और उसके आसपास का क्षेत्र जैव विविधता तथा औषधीय वनस्पतियों के लिहाज से बेहद समृद्ध है। यहां उपलब्ध कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। उनका मानना है कि इन वनस्पतियों का वैज्ञानिक परीक्षण और दस्तावेजीकरण किया जाए तो चिकित्सा विज्ञान को नई संभावनाएं मिलेंगी । साथ ही पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक पहचान भी प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डुमरिया के इन क्षेत्रों मे मेडिसिन रिसर्च के लिए काफी संभावनाएं मौजूद है। यदि सरकारी एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों का सहयोग मिले तो यह इलाका भविष्य में औषधीय अनुसंधान का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने वैज्ञानिक दल का पारंपरिक रीति-रिवाज से स्वागत किया और कहा कि गांव के लिए यह पहला अवसर है, जब कोई शोधकर्ता दल स्थानीय चिकित्सा परंपरा को समझने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उसका अध्ययन करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने पीढ़ियों से संचित औषधीय ज्ञान शोध दल के साथ साझा किया है तथा आगे भी हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर डॉ. देवतोष दत्ता के साथ अनिर्बान चौधरी, राकेश जैन, शेख शेरियल, भैरव महाराज और सत्य प्रकाश भी मौजूद रहे।

बहरहाल, सरकारी महकमों और सरकार के ईच्छा शक्ति पर निर्भर करता है कि, देश और दुनिया में लखाईडिह जैसी गुमनामी में छुपे हुए प्रतिभाओं को व्यवहार में ला सकते हैं कि नहीं। कहते हैं, कुछ अच्छा करना है तो अपनी सोच बदलने की जरूरत होती है। तब जाकर मुकाम हासिल होती है।

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