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चाईबासा के बाद भी नहीं जागा स्वास्थ्य विभाग! सरायकेला ब्लड बैंक में ‘खुला खेल’, रक्तदान शिविर बना लापरवाही का अड्डा

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रिपोर्टर – जगबंधु महतो

सरायकेला : झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था मानो किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है। चाईबासा ब्लड बैंक कांड से सबक लेने के बजाय सरायकेला सदर अस्पताल में वही पुरानी कहानी दोहराई गई। समाजसेवा के नाम पर आयोजित रक्तदान शिविर में जो हुआ, उसने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाह, संवेदनहीन और गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली को बेनकाब कर दिया।
सोमवार को कालूराम सेवा ट्रस्ट द्वारा सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक और काशी साहू महाविद्यालय परिसर में लगाए गए रक्तदान शिविर में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। शिविर, जो जीवन बचाने का माध्यम होना चाहिए था, वह अव्यवस्था, बदइंतजामी और आरोपों की प्रयोगशाला बन गया।

रक्त लिया, पहचान मिटाई! प्रमाणपत्र तक गायब

आरोप है कि सरकारी निर्देशों के बावजूद एक भी रक्तदाता को रक्तदान प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। सवाल उठता है—क्या रक्तदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
कहीं यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े घोटाले की पटकथा तो नहअल्पाहार के नाम पर मज़ाक

जहां नियम 50 रुपये के अल्पाहार का है, वहां रक्तदाताओं को नाममात्र का पेय पदार्थ और थोड़ी सी नमकीन थमा दी गई। कई जगहों पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं—यह सीधी-सीधी मानवता के साथ खिलवाड़ है।

डॉक्टर गायब, मरीज भगवान भरोसे

सबसे खतरनाक आरोप यह है कि शिविर में तैनात महिला चिकित्सक सिर्फ करीब एक घंटे तक मौजूद रहीं, उसके बाद बिना किसी चिकित्सकीय निगरानी के रक्तदान चलता रहा। अगर किसी रक्तदाता की तबीयत बिगड़ती, तो जिम्मेदार कौन होता?
क्या यह सीधे तौर पर जान जोखिम में डालने जैसा नहीं?

ब्लड बैंक कर्मी पर तानाशाही और बदसलूकी के आरोप

ब्लड बैंक कर्मी शिव सिंह पर आयोजकों और रक्तदाताओं के साथ अपमानजनक, तानाशाही और धमकाने वाले व्यवहार के आरोप लगे हैं। आरोप है कि सवाल पूछने पर लोगों को चुप कराया गया।

जांच प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में

सूत्रों का दावा है कि सुरक्षित रक्तदान के लिए जरूरी मेडिकल जांच और प्रोटोकॉल को भी हल्के में लिया गया। यह लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित आपराधिक कृत्य मानी जा सकती है।
शिकायत, जांच और वही पुराना आश्वासन
मंगलवार को कालूराम सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष व नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने अस्पताल उपाधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी। उपाधीक्षक ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

लेकिन सवाल अब भी जस का तस है

क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में ‘दबाकर’ खत्म कर दिया जाएगा?
सरायकेला ब्लड बैंक का यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर सड़ांध की खतरनाक चेतावनी है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली खबर रक्तदान शिविर से नहीं, किसी बड़ी त्रासदी से आ सकती है।