
झारखंड के 25 वर्ष : “राज्य मिला, स्वराज खोया” – आदिवासी संगठनों का रजत जयंती पर कड़ा संदेश

Arjun kumar pramanik……✍️
रांची : झारखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आज आदिवासी समन्वय समिति, आदिवासी जन परिषद एवं झारखंड उलगुलान संघ के संयुक्त तत्वावधान में “झारखंड के 25 वर्ष : क्या खोया, क्या पाया?” विषयक एक दिवसीय चिंतन-मन्थन कार्यक्रम राजधानी रांची में संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने तथ्यों व आंकड़ों के साथ सिद्ध किया कि राज्य गठन के मूल उद्देश्य – पांचवीं अनुसूची, CNT-SPT एक्ट का संरक्षण, 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति एवं जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों-मूलवासियों का ऐतिहासिक अधिकार – आज भी पूरे नही हुए। NCRB-2023 के अनुसार भूमि विवादों में 15% वृद्धि, CNT/SPT उल्लंघन के 70% से अधिक मामले हाईकोर्ट में लंबित,सरकारी नौकरियों का 60% हिस्सा गैर-झारखंडियों को तथा प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 30% कम होना इसकी गवाही देता है।
खनिज संपदा की लूट,अवैध खनन, बालू-पत्थर माफिया, वन क्षेत्र में 30% कमी, नक्सलवाद से 5,000 से अधिक मौतें, आदिवासी भाषाओं-सांस्कृतिक स्थलों पर अतिक्रमण तथा PESA एक्ट का कागजी क्रियान्वयन – ये वे कड़वे सच हैं।जिन्हें आदिवासी संगठनों ने बेनकाब किया। वहीं MNREGA-PMAY जैसे योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, युवाओं का पलायन और बढ़ती आर्थिक असमानता पर भी गहरी चिंता जताई गई।
आदिवासी बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि 25 वर्षों में झारखंड ने “राज्य” तो पा लिया, पर “स्वराज” खो दिया। आदिवासी-मूलवासी समुदाय को सम्मानजनक जीवन, हक और पहचान चाहिए थी, बदले में मिली लूट और हाशिये में रखा गया। इस अवसर पर आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि झारखंड में लूट खसौट की सरकार चल रही है। संवैधानिक नियम-कानून का उल्लघंन करके राजनेता अफसर माफिया राज में तब्दील हो गया है। आदिवासी जन परिषद के अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि 25 साल में झारखंड बेहाल हो गया । अलग राज्य मिला लेकिन राज्य के लोगों को अबुआ राज हासिल नही हुआ। पेसा कानून, जमीन कानूनों को लागू नही हुआ। झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेयस्टर बोदरा ने कहा कि झारखंड में संवैधानिक अधिकारों पर राज्य मशीनरी नौकरशाह संवैधानिक अधिकारों को कुचलने में लगे हैं। न्यायिक आदेशों को भी दरकिनार किया जा रहा है।
कांके रोड सरना समिति के अध्यक्ष डब्लू मुंडा ने कहा कि झारखंड लूटखंड में तब्दील हो चुका है। 25 वर्षों का झारखंड आज भी बदहाली के कगार पर आ खड़ा हो गया है।
इस परिचर्चा में लक्ष्मीनारायण मुंडा, प्रेमशाही मुंडा, अलेयस्टर बोदरा, डब्लू मुंडा, शिक्षाविद डॉ0 मुजफ्फर हुसैन, अनिल सिंह मुंडा, अमृत चिराग तिर्की, लक्ष्मण मुंडा,किष्टो कुजूर, मंदाकिनी मुंडा, पुष्पा कुमारी,देवसहाय टुटी मुख्य रुप से शामिल थे।
इस परिचर्चा में आह्वान किया गया कि अब केवल घोषणाएं नही, जवाबदेही चाहिए। यदि सरकारें तत्काल CNT-SPT की रक्षा, 1932 आधारित स्थानीय नीति लागू करने, खनिज राजस्व का उचित उपयोग और PESA का पूर्ण क्रियान्वयन नहीं करेंगी, तो नई पीढ़ी फिर से उलगुलान की राह पर चलने को मजबूर होगी।
इसके लिए नये वर्ष 3 जनवरी 2026 को मांरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के जयंती से उलगुलान वर्ष के रुप में मनाया जाएगा।

