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  • घाटशिला : बेकरी उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाया गया
    घाटशिला : बेकरी उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाया गया

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    घाटशिला : बेकरी उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाया गया

    दीपक नाग …✍️

    शहरी क्षेत्र और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिकने वाले बेकरी उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ‘सक्रिय संवेदना’ संस्था ने इस मामले को लेकर पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपकर नियमित जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    संस्था के सह-संयोजक प्रो. मित्रेश्वर ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा है कि घाटशिला और आसपास के गांवों में पाव, ब्रेड, पेस्ट्री, बन, बिस्कुट और केक जैसे उत्पादों का निर्माण और बिक्री बिना किसी तय मानक के खुलेआम की जा रही है। इन खाद्य सामग्रियों पर न तो निर्माण की तारीख (मैन्युफैक्चरिंग डेट) होती है और न ही एक्सपायरी डेट लिखी होती है। उपभोक्ता को यह समझने का कोई आधार नहीं मिलता कि वह जो खा रहा है, वह कितना पुराना या सुरक्षित है।

    प्रो. मित्रेश्वर ने उठाए कई गंभीर सवाल :-

    • बिना FSSAI लाइसेंस और खुला बेचना: आशंका है कि स्थानीय स्तर पर चल रही कई बेकरियों के पास FSSAI लाइसेंस तक नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर इन उत्पादों को बिना ढके और खुले में बेचा जा रहा है।

    •खराब सामग्रियां और फंगस की शिकायत: दुकानों में पुराना स्टॉक खपाने के लिए रख दिया जाता है। कई बार ब्रेड और पाव में फंगस (फफूंद) लगे होने की भी शिकायतें आम उपभोक्ताओं द्वारा की जाती हैं, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं।

    • केमिकल और मिलावट का खतरा: इन उत्पादों में मिलाए जाने वाले घटिया रंग, हानिकारक केमिकल्स, पाम ऑयल और खराब मैदा जन स्वास्थ्य के लिए बड़ा खिलवाड़ हैं। बरसात और उमस के मौसम में यह स्थिति और भी जानलेवा साबित हो सकती है।

    साप्ताहिक जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग :-

    प्रो. मित्रेश्वर ने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम (FSSAI 2011) के तहत हर पैक्ड फूड पर पूरी जानकारी होना अनिवार्य है, जिसके उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान है। उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि अनुमंडल स्तर पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) के माध्यम से बेकरी निर्माण इकाइयों और दुकानों की साप्ताहिक औचक जांच कराई जाए। साथ ही, मिलावटखोरों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर इसकी सूचना अखबारों में भी प्रकाशित की जाए ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल हो सके।

संथाल

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