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कोयलांचल

  • घाटशिला : सक्रिय संवेदना के सह-संयोजक प्रो. मित्रेश्वर ने शिक्षा संबंधित ईमेल किया
    घाटशिला : सक्रिय संवेदना के सह-संयोजक प्रो. मित्रेश्वर ने शिक्षा संबंधित ईमेल किया

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    घाटशिला : सक्रिय संवेदना के सह-संयोजक प्रो. मित्रेश्वर ने शिक्षा संबंधित ईमेल किया

    दीपक नाग …✍️

    प्रो. मित्रेश्वर ने सक्रिय संवेदना के सह संयोजक के तौर पर कुलाधिपति संतोष गंगवार को ईमेल के जरिए राज्य के विश्वविद्यालयीय समस्याओ के निराकरण हेतु ध्यानाकर्षण किया है. उन्होंने लिखा है कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की समस्त स्थिति का नियामक संरक्षक और उन्नायक होती है- शिक्षा कौशल। ज्ञान आधार और परिधि हैं, विकास यात्रा के ! इसी सत्य को स्वीकार कर हम मानते हैं कि, शिक्षा जगत की दुर्व्यवस्था दूर किए बिना प्रदेश की उन्नति, स्वप्न ही बनी रहेगी।

    कोल्हान विश्वविद्यालय का गठन वर्ष 2009 में हुआ. उन्होने दुख व्यक्त करते हुए लिखा है कि उम्मीद यह थी कि, राॅची विश्वविद्यालय से अलग होने पर इसके सभी विषयों और विभागों का मूल ध्यान क्षेत्रीय भूगोल, इतिहास, नृतत्व, समाज शास्त्र, भाषा साहित्य, पुरातत्व, कला, संस्कृति, विरासत, आदि पर होगा। झारखंड, कोल्हान, धालभूम,सरायकेला खरसांवां इसके मूल पाठ विषय होंगे जिन्हें, पाठ्यक्रम में जगह दी जायेगी, गवेषणा होगी और तत्संबंधी अनुसंधान को एक सबल आश्रय मिलेगा. अंधकार और अज्ञान में पड़ा कोल्हान का बौद्धिक और भौतिक वैभव प्रकाशित उद्घाटित होगा। वह मूल स्वप्न आज दृष्टिपथ से ओझल है।

    विभिन्न कक्षाओं के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम हैं जिन्हें पूरा करने का वादा “प्रोस्पेक्ट्स” में है लेकिन, उन्हें पूरा नही किया जाता. सिलेबस पूरा नही किया जाना छात्रों के साथ विश्वासघात है, साथ ही शिक्षण कार्य को अधूरा रखने का अपराध भी है। सिलेबस अधूरा मतलब, पढ़ाई अधूरी !

    अचरज व्यक्त करते हुए उन्होनें लिखा है कि, सिलेबस पूरे नही होते और परीक्षा पूरे सिलेबस की ली जाती है. तब, पढ़ाई की जिम्मेदारी निजी कोचिंग और ट्यूटोरियल संस्थाओं ने संभाल ली है. वि वि फेल कर गए तब समानांतर शिक्षा व्यवस्था का व्यापार शुरू हुआ . पढ़ाई होती तो समानांतर शिक्षा व्यवस्था का घिनौना कारोबार फलता- फूलता नहीं ! 

    बड़ी संख्या में शिक्षक विहीन विभाग हैं तब, शिक्षण विहीन विश्वविद्यालय हैं और तभी, पठन- पाठन की दयनीय दशा है ! निजी व्यवस्था पर टिकी पढ़ाई है . एडमिशन परिसर में, पढ़ाई कहीं और ! यह अत्यंत गंभीर मामला है

    शिक्षक नहीं , जरूरी संसाधन भी नहीं मगर, एडमिशन होगा ; पढ़ाई नही मगर, साल भर की फीस ली जायेगी; प्रत्येक छात्र को शिक्षणेत्तर गतिविधि का वादा मगर, कार्य कलाप नगण्य – तब, सर्वांगीण विकास एक मरीचिका ही प्रमाणित होगी.

    उनके अनुसार हाल यह है कि, विश्वविद्यालय में सारे महत्वपूर्ण पद तदर्थ (एड हॉक) नियुक्तियों के भरोसे हैं। स्थायी प्रधानाचार्य नहीं, कोई वित्त परामर्शी नहीं, लेखा, वित्त, व्यावसायिक प्रशिक्षण परीक्षा, आदि विभाग/प्रभार मनोनीत शिक्षकों के भरोसे ! पढ़ाई और अच्छी पढ़ाई की संभावना ही नहीं, ऐसे हालात में !

     दुख है कि छात्रों की संख्या के अनुपात में स्वीकृत पदों की संख्या बहुत कम है। एडमिशन बेतहाशा बढ़ा, सृजित पद लगभग दशकों पुराने रह गए। नामांकन हुआ इनके लिए संसाधन की परवाह हुई नहीं !

    कोल्हान से बेहतर हालत संभवतः दूसरे वि वि की नहीं है ! विद्या ही सर्वस्व होती है- मानवीय और भौतिक उत्थान हेतु। उन्होंने अनुरोध किया है की निवेदन पर अनुकूल और यथेष्ट कार्य किए जाएं। कुलाधिपति की रुचि और सक्रियता प्रांत की दशा और दिशा में गुणात्मक, वांछित और आवश्यक बदलाव ला सकेगी !

कोल्हान

  • चाकुलिया: स्वामी विवेकानंद आईटीआई कॉलेज में आयोजित दीक्षांत समारोह में चार ट्रेड के टॉपर्स को किया गया सम्मानित
    चाकुलिया: स्वामी विवेकानंद आईटीआई कॉलेज में आयोजित दीक्षांत समारोह में चार ट्रेड के टॉपर्स को किया गया सम्मानित

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    चाकुलिया: स्वामी विवेकानंद आईटीआई कॉलेज में आयोजित दीक्षांत समारोह में चार ट्रेड के टॉपर्स को किया गया सम्मानित

    संवाददाता: विश्वकर्मा सिंह
    चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र स्थित स्वामी विवेकानंद आईटीआई कॉलेज में भारत सरकार के निर्देशानुसार शुक्रवार को प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में सत्र 2024-25-26 के इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर एवं कोपा ट्रेड के संस्थान टॉपर्स को प्रशस्ति पत्र एवं सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अंचल अधिकारी नवीन पूर्ति शामिल हुए.

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नवीन पूर्ति ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इसके बाद दीक्षांत समारोह की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार वंदे मातरम् एवं प्रार्थना के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा. इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य तरुण कुमार मोहंती ने मुख्य अतिथि को पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया.

    शिक्षा का कभी अंत नहीं होता: नवीन पूर्ति

    समारोह को संबोधित करते हुए अंचल अधिकारी नवीन पूर्ति ने संस्थान के टॉपर्स सहित सभी प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की. उन्होंने कहा कि दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत है, लेकिन शिक्षा का नहीं शिक्षा ऐसी प्रक्रिया है, जिसका कभी अंत नहीं होता. विद्यार्थियों को जीवनभर नई चीजें सीखने और अपने ज्ञान को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद आईटीआई कॉलेज हमेशा से प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने के साथ-साथ बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करता रहा है. इससे क्षेत्र का नाम रोशन हो रहा है. इस बेहतर कार्य के लिए संस्थान के प्राचार्य एवं पूरी टीम बधाई की पात्र है.

    चार ट्रेड के टॉपर्स को किया गया सम्मानित

    दीक्षांत समारोह में विभिन्न ट्रेडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को सम्मानित किया गया. इनमें फिटर ट्रेड में संजीव गिरी ने 1200 में 1187 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया. वहीं, इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में संजय गिरी ने 1200 में 1184 अंक प्राप्त कर संस्थान में टॉप किया. इसी प्रकार कोपा ट्रेड में सुमित्रा सोरेन ने 600 में 588 अंक प्राप्त किए, जबकि वेल्डर ट्रेड में नीरा हांसदा ने 600 में 584 अंक हासिल कर संस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस दौरान सभी टॉपर्स को मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया.

    इस मौके पर संस्थान के प्रशिक्षक संजीत राउत, पियूष पात्र, मनोज बेरा, राजेन पाल, राम मुर्मू, बसंत महतो, राजू महतो, नृपेन्द्र महतो, शुक्ला मोहंती आदि उपस्थित थे.

संथाल

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