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कोयलांचल

  • चांडिल : चांडिल बांध विस्थापितों का दर्द और अनसुलझी कहानी, अपने ही घर में है बेघर…
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    चांडिल : चांडिल बांध विस्थापितों का दर्द और अनसुलझी कहानी, अपने ही घर में है बेघर…

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    चांडिल : चांडिल बांध विस्थापितों का दर्द और अनसुलझी कहानी, अपने ही घर में है बेघर…

    दीपक नाग… ✍️

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    50 सालों का दर्द, जल-जंगल-जमीन का संघर्ष जारी है, तख्त बदले, ताज बदले पर नहीं बदला चांडिल डैम विस्थापितों का जीवनी।

    चांडिल डैम का पचास साल पुराना इतिहास केवल कंक्रीट और पानी की कहानी नहीं है; यह हमारी माटी, हमारे अधिकार और हमारे पुरखों के संघर्ष की एक ऐसी दर्दनाक गाथा है, जिसमें तख्त बदले, ताज बदले, मगर विस्थापितों का दर्द आज भी वहीं का वहीं खड़ा है। यह बातें “चांडिल बांध विस्थापित मत्स्यजीवी स्वावलंबी सहकारिता समिति लिमिटेड” के सचिव श्यामल मार्डी ने एक मुलाकात के दौरान कहा । उनके के शब्दों अगर गहराई से सोचा जाए तो, खामोशी के पीछे एक हुंकार का एहसास हो रहा था।

    “पचास साल बीत गए, पर वो घाव आज भी हरा है।”

    श्यामल मार्डी आगे कहते हैं, जब इस चांडिल डैम को बनाने की नींव रखी जा रही थी, तब सिर्फ जमीन नहीं छिन रही थी, हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे पुरखों की छांव छिनी जा रही थी। जब गांव के प्रभावित होने से आतंकित लोगों ने अपनी वजूद को बचाने के लिए सीना तानकर खड़े हुए, तब हुकूमत ने बारूद की भाषा में जवाब दिया। उस दौर में अपने ही घर को बचाने के लिए आंदोलित लोगों को पुलिस की गोलियां खानी पड़ी थीं। उन्होंने कहा, हमारी छातियों पर गोलियां दागी गईं, हमारी माटी लाल हुई। हमने सोचा था कि वक्त बदलेगा, सरकारें बदलेंगी, नए चेहरे आएंगे तो हमारे आंसुओं का हिसाब होगा, हमारे विस्थापन का वाजिब हक मिलेगा। लेकिन हकीकत कुछ और है ? 

     उन्होंने कहा, नेता आए और चले गए, गद्दियां बदलीं, वादे बदले, पर हमारा दर्द नहीं बदला। आज भी हम अपनी ही जमीन पर बेगाने बनकर जी रहे हैं। अपने आवासीय, राशन कार्ड या अन्य सरकारी कार्यों के लिए विस्थापितों को आज भी डैम के कारण जल समाधि लिए जमीनी कागजातों को उपयोग में लाना होता है।

    श्री मार्डी ने कहा, हमने हार नहीं मानी है। जिस पानी में हमारे गांव डूबे, उसी पानी को हमने अपनी आजीविका का जरिया बनाया है। यह सहकारिता समिति केवल मछली पकड़ने का जरिया नहीं है, यह विस्थापितों के वजूद और स्वाभिमान की वो लड़ाई है जो गोलियों के साए में शुरू हुई थी और हमारे अधिकार मिलने तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा, चांडिल डैम में मत्स्य पालन और पर्यटकों को सेवा प्रदान कर विस्थापितों के घरों मे चूल्हा जलता है। राज्य के पर्यटन मंत्रालय के द्वारा किसी बाहरी संस्थान या ठेकेदार को चांडिल डैम परिसर में पर्यटकों के सेवा के लिए टेंडर दे दिया है। विस्थापित समिति के द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय में आवेदन दे कर तत्काल के लिए रोका गया है। जब कि, समझौते के अनुसार, यहां से किसी भी तरीके से होने वाली स्वरोजगार पर विस्थापितों का हक बताया गया है। उन्होंने ने कहा, घर-द्वार और ज़मीनें हमने खोया है, दुसरे किसी को भी यहां हमारे रोजी-रोटी मारने के लिए बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस संघर्ष के तीन कड़वे सच, आहुति और उपेक्षा :-

    डैम से दूसरों के खेत और शहर रोशन हुए, लेकिन जिन ग्रामीणों ने अपनी जमीन और खून दिया, दशकों के बाद भी स्थायी पुनर्वास नीति आज तक अधुरा पड़ा हुआ है। नित नये विभागीय अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है पर परिणाम “शुन्य” रहा है।

    सत्ता की बेरुखी :-

    दशकों में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नीतियों में दबा ही रह गया।स्वाभिमान की लड़ाई विस्थापन का दंश झेलने के बाद भी श्यामल मार्डी और उनके साथी मत्स्य सहकारिता के जरिए आत्मनिर्भरता और अपने अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ रहे हैं।

     

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कोल्हान

  • चाकुलिया: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर विधायक समीर कुमार मोहंती ने विभिन्न स्थानों पर फहराया तिरंगा

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    चाकुलिया: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर विधायक समीर कुमार मोहंती ने विभिन्न स्थानों पर फहराया तिरंगा

    संवाददाता: विश्वकर्मा सिंह
    80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्यक्रमों में क्षेत्र के विधायक समीर कुमार मोहंती शामिल हुए और राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर विधायक ने अपने कार्यालय के साथ-साथ चाकुलिया स्थित भगत सिंह चौक, बिरसा चौक सहित क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं.

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    इस अवसर पर विधायक समीर कुमार मोहंती ने कहा कि देश की आजादी अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है. उनके बलिदान को स्मरण करते हुए हमें लोकतंत्र, संविधान तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि देश, समाज और अपने क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारियों को समझने का भी दिन है.

    उन्होंने क्षेत्रवासियों से आपसी एकता, भाईचारे और सहयोग के साथ बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया. कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे.

     

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संथाल

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