
कुड़मी जाति को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर हुआ महाजुटान; राज्यपाल के
नाम उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन…
सरायकेला: कुड़मी जाति को एसटी की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी कुड़मी समाज के तत्वाधान में बुधवार का सरायकेला के बड़ाकांकड़ा मैदान में मनोहर महतो की अध्यक्षता में कुड़मी समाज का महाजूटान हुआ। कार्यक्रम के पश्चात कुड़मी जाति को यथाशीघ्र एसटी की सूची में शामिल करने को लेकर समाज का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल के नाम जिले के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। महाजूटान कार्यक्रम में जिले के सैकड़ो कुड़मी समुदाय के लोग अपने हक व अधिकार को लेकर सजग दिखे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेल रोको आंदोलन के पुरोधा सह आदिवासी कुड़मी समाज के मुलखुंटी मुलमान्ता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि कुड़मी समाज अपना अस्तित्व की लड़ाई में जन आंदोलन कर समाज को जागरूक कर रहा है। हमारे आन्दोलन का उद्देश्य है कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध कराना, कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करना और सारना धर्म कोड लागू कराना। कार्यक्रम में झारखंड और ओडिशा के आंदोलन को चरम पर पहुंचाने के लिए आंदोलन की घोषणा करते हुए बताया गया कि 10 जनवरी को प्रखंड स्तर पर, 12 मार्च को जिला स्तर पर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। ग्रीष्मकालीन सत्र में विधानसभा घेराव का कार्यक्रम होगा इसके बावजूद कुड़मी जाति को एसटी सूची में शामिल नही करने पर 20 सितंबर 2023 से झारखंड और ओडिशा राज्य में अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी व रेल रोको कार्यक्रम होगा।
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जो कुड़मी की हित में बात करेगा वही झारखंड में राज करेगा: बेसरा।
विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि जो कुड़मी हित की बात करेगा वही झारखंड में राज करेगा। बताया कि कुड़मी को आदिवासी बनाए बगैर हम झारखंड को आदिवासी राज्य का दर्जा नही मिल सकता है क्योंकि राज्य में 26 प्रतिशत आदिवासी है और कुड़मी को आदिवासी का दर्जा देने से यह 50 प्रतिशत के आसपास हो जाएगा। जिससे झारखंड को आदिवासी राज्य का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। बेसरा ने माझी-महतो भाई-भाई का नारा देते हुए कहा कि राज्य निर्माण में कुड़मी जाति का अहम योगदान रहा है। बेसरा ने कहा कि 23 नवंबर 2004 को अर्जुन मुंडा सरकार ने कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का अनुशंसा किया था। वर्तमान में अर्जुन मुंडा स्वयं केंद्र सरकार में आदिवासी मंत्रालय के मंत्री हैं। इन्होंने पिछले दिनों अपने तमाड़िया समेत 12 जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया। लेकिन 2004 में स्वयं द्वारा अनुशंसित किया गया कुड़मी जनजाति को छोड़ दिया।
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कुड़मी आदिवासी है जल्द मिले एसटी का दर्जा: विधायक लंबोदर महतो।
विशेष अतिथि गोमिया विधायक डॉ लम्बोदर महतो ने कहा कि कुड़मी जनजाति का अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध करने का मांग नया नहीं है। यह मांग बहुत पहले से चली आ रही है। जिसका हमने शुरू से समर्थन किया और आगे भी उसकी आवाज उठाते रहेंगे चाहे विधानसभा हो या जनसभा हो।
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कुड़मी को मिले अपना अधिकार: शैलेन्द्र महतो।
विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने कहा कि 1950 से पहले झाड़खंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम के टोटेमिक कुड़मी जनजाति देश की आजादी से पहले प्रिमिटिव ट्राइब्स (आदिम जनजाति) में सूचीबद्ध था किंतु जब अनुसूचित जनजाति का सूची तैयार हुआ तब सिर्फ कुड़मी को छोड़कर सभी आदिम जनजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में सूचीबद्ध किया गया। तब से अब तक 72 वषों से लगातार कुड़मी जनजाति एसटी सूची में सूचीबद्ध करने हेतु आंदोलनरत हैं। इसे पुनः स्थापित करना हमारे समाज का मौलिक कर्तव्य हैं। महाजुटान कार्यक्रम को पद्मश्री छुटनी महतो, हरमोहन महतो, मनोहर महतो, सुनील गुलिआर, सशधर काडुआर, खिरोधर महतो, श्र्वेता महतो समेत अन्य ने संबोधित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विजय महतो, अमूल्य महतो, प्रकाश महतो, पद्मलोचन महतो, जयराम महतो, गुणधाम मुतरुआर, सचिन महतो, सत्यनारायण महतो, दुर्गा चरण महतो, प्रकाश महतो, रूद्र प्रताप महतो, राजाराम महतो व डॉ जगदीश महतो समेत अन्य का सराहनीय योगदान रहा।


