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उत्साह के साथ भक्ति भाव से गांव घर में पूजी जा रही है शर्पों की देवी मां मनसा, बाधा विघ्न से खुद को दूर रखने के लिए लोग कर रहे हैं मां की अरधना…

चांडिल (परमेश्वर साव) : मां के आनिते जाबो चूड़ा नदीर फूल… गलाई दिबो चांद माला, चरोणे जोबा फूल…. कुछ ऐसे ही गीतों और ढोल-ढाक के साथ हर्षोल्लास से सर्पों की देवी माता मनसा की आराधना संपन्न हुई। दिन भर उपवास रहकर भक्तों ने रात में मां की पूजा अर्चना की। रात भर चली पूजा संपन्न होने के पश्चात् शुक्रवार को प्रातः काल मां के चरणों में बलि दी गई। पूजा को लेकर भक्ति का वातावरण चारों ओर देखा जा रहा है।

चांडिल प्रखण्ड के रुचाप, हाटतोला, बनियापाड़ा, दालग्राम, गांगुडीह, कटिया सहित विभिन्न गांव घर के मनसा मंडपों पर प्रतिमा स्थापित कर मां मनसा पूजा का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान मां मनसा का मंगल पाठ किया गया। तालाब से जल लाकर भक्तिगीतों के साथ कलश पूजा हुई।

पारंपरिक तरीके से हुई मां मनसा की पूजा

पूजा के दौरान मां को फल-फूल, घटरा, पेड़ा आदि चढ़ाए गए। आधी रात में निशी पूजा की गई। यह पूजा मुख्य तौर पर तीन दिनों तक चलती है। पहले दिन श्रद्धालु नहाय-खाय करते हैं एवं संयम में रहते हैं। दूसरे दिन उपवास में रहकर रात में मां की विधि-विधान से पूजा करते हैं। विषैले जीवों के दंश से बचने के लिए मां मनसा की पूजा की जाती है।

चांडिल प्रखंड के कई भागों में मनसा पूजा को लेकर काफी धूम देखा जा रहा है। कई स्थानों पर इस पूजा का समापन हुआ तो कहीं शुक्रवार से यह पूजा आरम्भ हो गया। दालग्राम, बोंडीह, दड़दा आदि स्थानों में गुरुवार को इस पूजा का समापन किया गया। बंगला श्रावण माह के संक्रांति से मनसा पूजा आरम्भ हुआ। वहीं पूजा को लेकर हर ग्राम में उत्साह देखा जा रहा है। पूरा भाद्र मास इस इलाके में मां मनसा का पूजा आयोजित किया जाता है। जिस स्थान पर पूजा का आयोजन होता है वहां पर पूरी रात मां मनसा के गीत भजन एवं मंत्रों से ग्राम का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय बना रहता है।

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