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सामाजिक संस्था “युवा” द्वारा जिला स्तरीय वार्षिक रिथिंक कार्यक्रम का आयोजन

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संवाददाता : अभिजीत सेन

जमशेदपुर। सामाजिक संस्था “युवा” (Youth Unity for Voluntary Action) द्वारा जिला स्तरीय वार्षिक “रिथिंक” कार्यक्रम का आयोजन साकची स्थित केनलाइट होटल में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों — विशेषकर लड़कियों, महिलाओं, विकलांग महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय — की राजनीतिक भागीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय पर संवाद और पुनर्विचार करना था। कार्यक्रम का संचालन अंजना देवगम ने किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों द्वारा पौधे में जल अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख अतिथियों में डॉ. दीपक गिरी (विशेषज्ञ, जिला मानसिक स्वास्थ्य विभाग), अनामिका (प्रखंड प्रोग्राम प्रबंधक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका), प्रीति मुर्मू (वकील, DLSA), डॉ. अशोक कुमार रवानी (सहायक प्रोफेसर, वाणिज्य विभाग, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज), मुखिया संघ अध्यक्ष पानो सरदार, सचिव अभिषेक सरदार, झारखंड विकलांग मंच अध्यक्ष अरुण कुमार, महिला कल्याण समिति सचिव अंजली बोस, ICRW सदस्य नसरीन जमाल और संस्था की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती शामिल थीं।

युवा संस्था के कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने स्वास्थ्य को बेहतर रखने की पांच अच्छी आदतों पर प्रकाश डाला। वहीं संस्था की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती ने कहा कि “रिथिंक” समाज में जेंडर समानता, न्याय और समावेशिता की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि अब समय है कि हम पुनर्विचार करें कि कैसे भेदभाव कम किया जाए और सभी जेंडर पहचान वाले व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं व सार्वजनिक स्थानों में समान अवसर मिले।

ICRW की सदस्य नसरीन जमाल ने झारखंड में जेंडर आधारित हिंसा की स्थिति और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने सखी वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।
अनामिका (BPM-CHC पोटका) ने स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी।
डॉ. दीपक गिरी ने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं, और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि DLSA के साथ मिलकर चार प्रखंडों में कैप कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

डॉ. अशोक कुमार रवानी ने शिक्षा के क्षेत्र में बाधा-मुक्त वातावरण की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि उनके कॉलेज में विकलांग छात्रों की सुविधा के लिए रैम्प बनाए गए हैं।
वकील प्रीति मुर्मू ने महिलाओं के कानूनी अधिकार और उनकी प्रक्रिया पर जानकारी दी।
महिला थाना साकची की सुलेखा टोप्पो ने कहा कि महिलाओं को किसी भी प्रकार की हिंसा की स्थिति में बिना झिझक पुलिस की मदद लेनी चाहिए।
ट्रांसजेंडर समुदाय की प्रतिनिधि ऋषिका ने कहा कि समाज के सभी स्तरों पर उन्हें समान अवसर और सम्मान की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में इब्तिदा नेटवर्क, विकलांग साथी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
अंत में संस्था की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

यह “रिथिंक संवाद” कार्यक्रम समाज में समानता, समावेशन और संवेदनशीलता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसमें विभिन्न सामाजिक संस्थान, सरकारी विभाग और समुदाय प्रतिनिधि एक बेहतर, समावेशी भविष्य के निर्माण पर एकजुट हुए।

इस आयोजन को सफल बनाने में चांदमनी, रिला, किरण, रतन, हेमंती, श्रुति, अंजली और प्रियंका ने सक्रिय भूमिका निभाई।