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सरहुल राज्य के सुख और शांति का प्रतिक है, आदिवासी

समुदाय साल के फुल को शुभ मानकर सरना मां की पूजा अर्चना

करती है……..

मांदल के थाप पर नाच कर मां को प्रसन्न कर परिवार की रक्षा की कामना करती है ………

रांची (नामकुम) – झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस खुबसूरत और मनभावन त्योहार में आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि आम लोग भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। दूसरी ओर सरहुल को लेकर आदिवासी समाज में खासा उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। आदिवासी बहूल राज्य होने की वजह से यहां इस पर्व पर लगभग सभी जिलों में आपको आज के दिन पांरपरिक वेशभूषा में नाचते-गाते नजर आ जाएंगे।

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इस वर्ष कोरोना काल के बाद आदिवासी समुदाय में सरहुल पूजा को लेकर काफी उत्साह देखी गई । जिसको लेकर सरहुल पूजा कमिटि नामकुम के द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व सरहुल का घुम-घाम से मनाया ।

मुख्य अतिथि के रूप मे विधायक राजेश कच्छप एवं मंच पर आसीन अतिथि थाना प्रभारी नामकुम,प्रदेश भाजपा नेत्री आरती कुजूर,,प्रदेश भाजपा नेता मनोज सिंह,,रमेश पाण्डेय, बिकु सिंह, सोनल कच्छाप, बिरसा पहन, किरण सांगा, अनीता तिर्की, रामोतार करकेटा,, दिलीप मुण्डा,, चन्दर कोरियर,, मुरलीधर को परंपरागत रूप से साल का फुल और अबीर लगा कर स्वागत किया ।

सभी परंपरागत वेशभूषा के साथ आसपास के लगभग 15 खोड़ा टीम ने हिस्सा लिया और परंपरिक सरना झंडा,, के साथ सरना माँ की पूजा कर नाच गान करते हुए,, पूजा अर्चना किये,,, समिति की ओर से सभी टीमों क़ो झंडा, चना,, धोती देकर सम्मानित किया गया,, मुख्य अतिथि विधायक राजेश कच्छप ने प्रकृति पर्व पर प्रकृति और परम्परा की रक्षा की अपील की ।

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