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अचानक फैली बच्चा चोरी अफवाह, फंस गए भागलपुर के पांच लोग
रिपोर्टर  : झंटू पाल

काठीकुंड: बच्चा चोरी की अफवाह के कारण एक बोलेरो में सवार होकर भागलपुर से तारापीठ जा रहे पांच लोगों को काठीकुंड थाना क्षेत्र के चिरूडीह गांव में बीते शुक्रवार रात को बंधक भी बना लिया गया. पुलिस-प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें छुड़ाया. इस बीच दुमका एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने जिले के सभी लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की अफवाहों में न पड़ें, ऐसा कहीं कोई मामला नहीं है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई इस तरह की अफवाहों में फंसकर कानून को अपने हाथ में लेता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, दुमका के काठीकुंड, शिकारीपाड़ा, मसानजोर और मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में कल देर रात यह अफवाह तेजी से फैली कि बच्चा चोरों का गिरोह आया है. जो घर के बाहर घूम रहे छोटे-छोटे बच्चों को अपने कब्जे में लेकर भाग रहा है. इस अफवाह के बाद कई ग्रामीण रात में ही लाठी-डंडा लेकर निकल पड़े. भागलपुर के सन्हौला के पांच लोग इस अफवाह के चंगुल में फंस गए. ये सभी सन्हौला से काठीकुंड होते हुए गोड्डा और गूगल मैप के जरिए तारापीठ की ओर बोलेरो में सवार होकर जा रहे थे. गाड़ी में राजकुमार चौधरी, सिकंदर वर्मा, नरेंद्र चौधरी, सुधांशु कुमार झा और चालक मो. मनीर सवार थे. रास्ते में आमगाछी-कल्याणपुर मुख्य मार्ग पर चिरुडीह गांव के पास ग्रामीणों ने बच्चा चोर होने के संदेह में इनकी गाड़ी रोक ली और इन्हें आंगनबाड़ी केंद्र में ले जाकर बंधक बना लिया. यह खबर भी हर जगह फैल गई कि पांच बच्चा चोर पकड़े गए हैं. यह सुनते ही आसपास के कई गांवों के लोग जुट गए. हालांकि गनीमत रही कि ग्रामीणों ने इनके साथ मारपीट नहीं की।इधर, पुलिस प्रशासन को सूचना मिलते ही दुमका एसडीपीओ विजय कुमार महतो और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए. सभी ने मौजूद ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया कि ये बच्चा चोर नहीं हैं बल्कि पूजा के लिए तारापीठ जा रहे हैं. पुलिस प्रशासन के समझाने पर चिरुडीह गांव के लोग कुछ देर बाद उन्हें जाने देने को राजी हो गए लेकिन आसपास के गांवों से जुटे लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया कि उन सभी को आंगनबाड़ी से हमारे सामने लाया जाए. हम सभी उनसे पूछताछ करेंगे और पता लगाएंगे कि ये बच्चा चोर हैं या नहीं. अब पुलिस प्रशासन के लिए उन ग्रामीणों के सामने पांचों को लाना संभव नहीं था. मामला बिगड़ने की प्रबल संभावना थी. वे लोगों को समझाने का प्रयास करते रहे कि वे सभी तारापीठ जा रहे हैं और बच्चा चोर की खबर अफवाह है. इसी बीच चिरुडीह गांव के ग्रामीणों ने भी मोर्चा संभाल लिया और इसे अपने गांव का मामला बताकर बाहरी ग्रामीणों को भगा दिया और वे पांचों अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए.

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