
खड़िया समुदाय के पारंपरिक पदाधिकारियों ने अमृत चिराग तिर्की को भेंट की पुस्तक “स्वशासन की धरोहर”

Repoter : Dinesh Hazam
सिमडेगा । खड़िया समुदाय के पारंपरिक स्वशासन डाकला सोहोर से जुड़े पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं ने समाज और स्वशासन से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तक “स्वशासन की धरोहर” भारत आदिवासी पार्टी के सिमडेगा जिला अध्यक्ष अमृत चिराग तिर्की को भेंट की। इस अवसर पर पारंपरिक स्वशासन डाकला सोहोर के महासोहोर सह अधिवक्ता सुशील सोरेंग, कलो सह अधिवक्ता अलेक्स जॉनसन केरकेट्टा तथा सोहोर सह अधिवक्ता जॉन एलविस कुल्लू ने संयुक्त रूप से उन्हें यह पुस्तक प्रदान की। सभी अधिवक्ता सिमडेगा न्यायालय में प्रैक्टिस करते हैं।
यह पुस्तक वरिष्ठ अधिवक्ता रश्मि कात्यायन एवं अधिवक्ता सुशील उरांव द्वारा लिखी गई है। पुस्तक में झारखंडी पहचान, आदिवासी लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक में विशेष रूप से पेसा अधिनियम 1996, पेसा नियमावली 2025, अनुसूचित जनजातियों के लिए संवैधानिक प्रावधान, पांचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 244 (1), अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था तथा झारखंड राज्य आदेश 2007 जैसे महत्वपूर्ण विषयों की विस्तार से चर्चा की गई है।
इसके साथ ही आदिवासी भूमि संरक्षण से जुड़े कानून, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act), पेसा नियमावली की रूपरेखा, न्यायिक दृष्टिकोण, शहरी आदिवासी शासन एवं नगर पालिका (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) MESA अधिनियम 2001 जैसे विषयों को भी पुस्तक में समाहित किया गया है।
पुस्तक प्राप्त करने के बाद अमृत चिराग तिर्की ने कहा कि यह कृति झारखंडी पहचान, आदिवासी स्वशासन व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसी पुस्तकों से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और नई पीढ़ी अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग होगी।
उन्होंने लेखकों एवं खड़िया समुदाय के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक समाज के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।
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