
आईटीआई में आयोजित हुई भावपूर्ण सभा

चांडिल । स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, जनजातीय अस्मिता के प्रतीक और धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के अवसर पर नारायण प्राइवेट आईटीआई, लूपुगड़ीह में एक श्रद्धा और प्रेरणा से परिपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रबंधन ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन संघर्ष और योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण से हुई, जिसके पश्चात उनके जीवन पर आधारित प्रेरक वक्तव्यों की श्रृंखला चली। संस्थान के संस्थापक जटाशंकर पांडे, उपनिदेशक प्रो. सुदिष्ठ कुमार समेत शिक्षकों और स्टाफ ने बिरसा मुंडा के क्रांतिकारी व्यक्तित्व, सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में संस्थापक जटाशंकर पांडे ने कहा, “बिरसा मुंडा केवल मुंडा जनजाति ही नहीं, बल्कि संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र के जननायक थे। उनके नेतृत्व में छेड़ा गया ‘उलगुलान’ आज भी आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन बलिदान, समर्पण और संघर्ष की मिसाल है, जिसने समाज को एक नई दिशा दी।
वक्ताओं ने कहा कि 19वीं सदी के अंत में जब ब्रिटिश हुकूमत ने आदिवासियों के अधिकारों का हनन किया, तब बिरसा मुंडा ने उन्हें संगठित कर प्रतिरोध की मशाल जलायी। वे क्रांतिकारी नेता, समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने आदिवासी समाज को अंधविश्वास से मुक्त कर आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई सिखाई।
सभा में विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि बिरसा मुंडा का जीवन आज की पीढ़ी के लिए संघर्ष, चेतना और नेतृत्व का प्रतीक है। उनके सिद्धांतों को आत्मसात कर ही समाज को न्याय, समानता और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

