
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा जागरण के लिए मिला सम्मान
ट्राइबल गांवों में परिवर्तन का माध्यम बनी शिक्षा अभियान : डॉ. मयंक मुरारी

Arjun Kumar Pramanik…….✍️
नामकुम(रांची)। जिन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में शिक्षा की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है, वहाँ उषा मार्टिन समूह 600 बच्चों को शिक्षा, स्वाभिमान और स्वावलंबन से जोड़ रहा है। इस अभियान में एकल विद्यालय को सहयोगी बनाया गया है।
फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसाइटी ने जनजातीय इलाकों में शिक्षा जागरण के लिए उषा मार्टिन को सम्मानित किया है। देश के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एक कार्यक्रम में उषा मार्टिन के महाप्रबंधक डॉ. मयंक मुरारी को यह सम्मान प्रदान किया।
इन विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को अक्षर ज्ञान के साथ संस्कार और परंपरा की शिक्षा भी दी जा रही है।
पंचमुखी शिक्षा अभियान बना परिवर्तन की धुरी
उषा मार्टिन फाउंडेशन के सचिव डॉ. मयंक मुरारी ने बताया कि दो वर्ष पूर्व ट्राइबल गांवों में एकल अभियान शुरू किया गया था। धीरे-धीरे यह विद्यालय ग्रामीण आवश्यकताओं के आधार पर शिक्षा, आरोग्य, ग्राम विकास, स्वाभिमान जागरण और संस्कार शिक्षा का पंचमुखी अभियान बन गया।
बच्चों को बुनियादी शिक्षा के साथ जीवन के व्यवहारिक तौर–तरीकों की भी जानकारी दी जाती है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना विकसित हो सके।
उन्होंने बताया कि अनौपचारिक शिक्षा गांव के ही युवकों और युवतियों द्वारा दी जाती है। संस्कार शिक्षा के चलते वनवासी एवं जनजातीय समाज में कई सकारात्मक परिवर्तन आए हैं।
ग्राम विकास की अवधारणा जमीन पर उतरी
अंचल अभियान प्रमुख हीरालाल महतो ने कहा कि विद्यालय के बच्चों में परंपरा और संस्कार देखकर स्पष्ट होता है कि उन्हें शिक्षा, संस्कृति, स्वरोजगार और ग्राम विकास से जोड़ना बेहद जरूरी है।
सासनबेड़ा की स्कूल इंचार्ज आशापति देवी ने बताया कि बच्चों को संस्कारों के साथ अक्षर ज्ञान और गांव की महिलाओं को सांस्कृतिक जागरण तथा ग्रामीण विकास की जानकारी दी जा रही है।
एजुकेशन कोऑर्डिनेटर सुगन देवी ने बताया कि यह विद्यालय सासनबेड़ा, मसरीजारा, पइका, जरगा, मेढ़ा, बानपुर, असरी, जिरकी, जाराटोली और सालहन सहित अन्य गांवों में संचालित है।
सुदूरवर्ती इलाकों में शिक्षा की व्यवस्था
उषा मार्टिन फाउंडेशन और एकल विद्यालय संयुक्त रूप से टाटीसिलवे के 15 ट्राइबल गांवों में समाज परिवर्तन का अभियान चला रहे हैं।
लाइवलीहुड कोऑर्डिनेटर संगीता कुमारी ने बताया कि आज भी कई दूरस्थ गांवों में शिक्षा की कोई सीधी व्यवस्था नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में एकल विद्यालय के माध्यम से गांव के ही युवक-युवतियों द्वारा बच्चों को तीन घंटे की अनौपचारिक शिक्षा दी जाती है।
इस वर्ष बड़कुंबा, चतरा, हाहे, सिलवई और उलातू में पाँच नए एकल विद्यालय खोले गए हैं।
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