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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका में युवा संस्था-यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी तथा क्रिया संस्था, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।

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संवाददाता : अभिजीत सेन

जामशेदपु /पोटका । मानवाधिकार दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पोटका में युवा संस्था– यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी एक्शन तथा क्रिया संस्था, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जेंडर आधारित हिंसा, डिजिटल हिंसा और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की भूमिका को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम का उद्धघाटन संयुक्त रूप से पौधा में पानी डाल कर किया गया । उद्धघाटन में डॉ. रजनी महाकुड, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका, अनामिका सिंह प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, बुढ़ाई मुर्मू, ब्लॉक आशा फैसिलिटेटर, कविता भगत एवं दीपाली पात्रो, सहिया साथी; तथा अपर्णा वाजपेई, रिसोर्स पर्सन शामिल थीं।उद्धघाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. रजनी महाकुड ने कहा कि “जेंडर आधारित हिंसा लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को पीड़ित महिलाओं की पहचान, सहायता और उचित रेफरल में संवेदनशील भूमिका निभानी होगी।”
अनामिका सिंह ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि “स्वस्थ रहना ही हमारी अपनी क्षमता को बढ़ाता है और तभी हम समुदाय को बेहतर सहायता दे सकते हैं।”रिसोर्स पर्सन अपर्णा वाजपेई ने पीपीटी प्रस्तुति, केस स्टडी और संवादात्मक सत्र के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य की शुरुआत हमारी भावनात्मक समझ से होती है। मानसिक बीमारी के प्रमुख कारणों में सामाजिक परिस्थितियाँ, जैविक कारण, जीवन के कठिन अनुभव और नकारात्मक विचारों का बढ़ना शामिल हैं।  लक्षणों की पहचान, प्रभावों को समझना और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के उपायों को विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण में पोटका प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से आई सहिया साथी एवं सहिया उपस्थित रहीं। प्रतिभागियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रहा। उन्होंने कहा कि अब वे समुदाय की महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और हिंसा से संबंधित समस्याओं को समझते हुए बेहतर सहायता प्रदान कर सकेंगी। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर अंजना देवगम द्वारा स्वागत भाषण और 16 दिवसीय अभियान के उद्देश्यों की जानकारी के साथ हुई।