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जिला अध्यक्ष बोले—गरीब विरोधी सोच उजागर, गांधी लोगों के दिलों से नहीं निकलेंगे

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संवाददाता : जगबंधु महतो

रायकेला : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदले जाने के विरोध में पूरे झारखंड प्रदेश में चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने सरायकेला जिला मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष राज बागची ने किया। इस दौरान केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राज बागची ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलना न केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है, बल्कि उनकी विरासत को समाप्त करने की साजिश भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला सीधे तौर पर गरीब, किसान और मजदूर विरोधी है। मनरेगा का नाम बदलकर केंद्र सरकार मजदूरों के 100 दिन के रोजगार की गारंटी को कमजोर कर रही है।
उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों में राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकारों को 40 प्रतिशत खर्च वहन करना होगा। इससे राज्यों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा और गरीब, किसान व मजदूरों को समय पर काम मिलना मुश्किल हो जाएगा। राज बागची ने चेतावनी दी कि नाम बदलने से न सिर्फ योजना की मूल भावना कमजोर होगी, बल्कि देश को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार गांधी जी की विचारधारा और गरीबों के अधिकारों को कमजोर करना चाहती है, लेकिन सिर्फ नाम बदलने से गांधी लोगों के दिलों से नहीं निकलेंगे। इससे केवल भाजपा की गरीब विरोधी सोच और अधिक उजागर होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा मजदूरों के लिए जीवनरेखा साबित हुई थी। राज बागची ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय मजदूरों को 15 दिनों के भीतर भुगतान का कानूनी अधिकार था, जबकि भाजपा शासन में मजदूरों को महीनों तक मजदूरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कई इलाकों में पिछले तीन वर्षों से भुगतान लंबित है, जो मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं की, तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी। जरूरत पड़ी तो किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए जेल भरो आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगी।

इस प्रदर्शन में संगीता प्रधान ,प्रमेन्द्र मिश्रा, घोटेराय किस्कू, देबू चटर्जी, शुशील सिंह,
फुलकांत झा,मोहमद मुरतेज,खिरोद सरदार,
डोमन महतो,सुरज महतो,
कोन्दो कुम्भकार,फागू मुंडा, मानसिंह मुंडा,राहुल मुदी, कृष्णा चंद्र सोय, सुमित महतो,हरि महतो
बागून सोय,सौरव ताँती आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।

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