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स्कूल में अड्डेबडजी और चोरी की घटना को लेकर चाण्ड़िल पुलिस पहुंची जांच करने

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चांडिल थाना प्रभारी डिल्सन बिरुवा ने चोरी घटना को लेकर बताया स्कूल के प्रधान अध्यापक से बातचीत कर आगे की कार्रवाई की जाएगी

चांडिल : विद्यालय में अड्डेबाजी और चोरी से परेशान ग्रामीणों ने की चारदीवारी और स्पीड ब्रेकर की मांग, सामाजिक कार्यकर्ता बाबूराम सोरेन ने डीएफओ से की अपील

बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पीड ब्रेकर जरूरी, स्कूल परिसर में चारदीवारी की मांग, वन विभाग के साथ साथ प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

सरायकेला-खरसावां : जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत चिलगु पंचायत के चाकुलिया स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में लगातार हो रही अड्डेबाजी और चोरी की घटनाओं से परेशान स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल परिसर में चारदीवारी निर्माण और सड़क पर स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ता बाबूराम सोरेन ने बताया कि इस विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं लेकिन यह इलाका दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के इको-सेंसिटिव जोन में आता है। पहाड़ी और वन क्षेत्र होने के कारण यहां वन विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों पर्यटक प्रतिदिन स्कूल के सामने से गुजरते हैं लेकिन किसी का ध्यान विद्यालय की सुरक्षा पर नहीं जाता। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के सामने से तेज रफ्तार में वाहन गुजरते हैं जिससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा है। स्पीड ब्रेकर का निर्माण होना चाहिए ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाहर से आने वाले पर्यटक स्कूल परिसर में अड्डेबाजी करते हैं, शराब व मांस-मछली का सेवन करते हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों के लिए अशांत माहौल बन जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए विद्यालय परिसर में चारदीवारी का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। बाबूराम सोरेन ने दलमा के डीएफओ (वन प्रमंडल पदाधिकारी) से अपील करते हुए कहा कि 200 करोड़ रुपये की विकास योजना के तहत दलमा क्षेत्र का विकास किया जा रहा है, लेकिन इस योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विद्यालय की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया, तो वे 200 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब जरूर लेंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से अतिशीघ्र उचित कदम उठाने की मांग की है ताकि विद्यालय परिसर सुरक्षित हो सके और बच्चों की शिक्षा में कोई बाधा न आए।