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सिल्ली विधायक सुदेश कुमार महतो ने सदन में उठाया चांडिल डैम के विस्थापितों का मुद्दा….

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आजसू प्रमुख के प्रश्न पर सरकार ने झूठा जबाव देकर विस्थापितों और किसानों का अपमान किया…

चाण्डिल (कल्याण पात्रा)   शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं सिल्ली के विधायक सुदेश कुमार महतो ने सदन में चांडिल डैम का मुद्दा उठाया। सुदेश कुमार महतो ने सदन में पूछा कि क्या यह बात सही है कि सरायकेला खरसावां जिले में चांडिल डैम निर्माण हुआ है जिससे सरायकेला खरसावां एवं पूर्वी सिंहभूम जिले के कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस प्रश्न का उत्तर सरकार ने स्वीकारात्मक किया है। यानी कि चांडिल डैम के पानी से दोनों जिलों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हैं। सिल्ली विधायक सुदेश कुमार महतो ने सदन में यह भी पूछा कि क्या यह बात सही है कि डैम के निर्माण होने से हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं, जिसपर सरकार ने स्वीकार किया है। सुदेश कुमार महतो ने अपने तीसरे प्रश्न पर सदन में सवाल पूछा कि क्या यह बात सही है कि विस्थापितों को बसाए गए गांवों का सीमांकन नहीं हो पाया है,

जिसपर सरकार ने जबाव दिया है कि कुल 22 पुनर्वास स्थल में से 18 पुनर्वास स्थल का सीमांकन कार्य पूरा हो चुका है और शेष 14 पुर्नवास स्थल पर कार्य प्रगति में है। सिल्ली विधायक ने यह भी पूछा कि विस्थापितों को बंडा – पर्चा नहीं दिया गया है? सुदेश कुमार महतो के इस प्रश्न को सरकार ने स्वीकार किया है। सुदेश कुमार महतो ने सदन से पूछा है कि सरकार विस्थापितों के लिए बसाए गए गांवों का सीमांकन करने तथा उन्हें बंडा – पर्चा एक समय सीमा के अंदर उपलब्ध कराने का विचार रखती है? हां तो कब तक, नहीं तो क्यों? इस प्रश्न के आलोक में सरकार का जबाव आया है कि सरायकेला खरसावां उपायुक्त द्वारा अग्रेतर कार्रवाई किया जा रहा है।

आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो ने सरकार के जबाव पर नराजगी जताते हुए झूठा सरकार बताया है। हरेलाल महतो ने कहा कि आजसू प्रमुख सह सिल्ली के विधानसभा सदस्य सुदेश कुमार महतो विस्थापितों और किसानों के हित में सदन में प्रश्न किया, जिसपर राज्य सरकार ने झूठा जबाव दिया है। राज्य सरकार ने सदन में झूठा जबाव देकर चांडिल डैम के विस्थापितों और किसानों का अपमान किया है।

राज्य सरकार को चांडिल डैम के विस्थापितों और किसानों से माफी मांगनी चाहिए। हरेलाल महतो ने कहा कि चांडिल डैम के पानी से 10 प्रतिशत किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। विस्थापितों को बसाए गए पुनर्वास स्थलों का मालिकाना हक नहीं दिया गया है, इसके कारण विस्थापितों को काफी परेशानी होती हैं।

हरेलाल महतो  ने सरकर पर आरोप लगाया की विस्थापितो की पहचान छिन ली . ..

वर्तमान समय में विस्थापित अपनी जमीन देकर खुद पहचान के मोहताज बन गए हैं। हरेलाल महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं विस्थापन आयोग गठन करके विस्थापितों को हक़ – अधिकार देने का चुनावी घोषणा किया है लेकिन सरकार ने तीन साल में एक दिन भी उस विषय पर चर्चा भी नहीं किया है।

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