
ननिहाल में लुटा बचपन, अपनों ने ही दिया जख्म; फिर न्याय का ढाल बना डालसा, रांची

Arjun Kumar …..
रांची । अनगड़ा की 13 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसके सिर से मां का साया पहले ही उठ चुका था, के साथ उसके ननिहाल में हुए रूह कंपा देने वाले उत्पीड़न के मामले में डालसा, रांची ने त्वरित कार्रवाई कर न्याय की मिसाल पेश की है। अपनी बुआ के साथ नानी के घर गई बच्ची को पड़ोस की एक महिला ने सोने के बहाने अपने घर बुलाया, जहां महिला के पुत्र ने उसके साथ दुष्कर्म किया और डरा-धमका कर लगातार यौन शोषण करता रहा। स्वास्थ्य बिगड़ने पर जब बुआ ने डॉक्टर से जांच कराई तो बच्ची के गर्भवती होने का पता चला। घटना की जानकारी होने पर बच्ची के मामा-मामी ने लोक-लाज के भय से मामले को दबाने के लिए गांव में बैठक बुलाई और बच्ची को बंधक बनाकर घर में ही उसका प्रसव कराया। 24 मार्च 2026 को नवजात की मृत्यु के बाद आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए बच्ची को जान से मारने की धमकी देकर घर से बाहर निकाल दिया। इस अमानवीय कृत्य की सूचना पीएलवी बेबी देवी के माध्यम से मिलने पर झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष (झालसा) सुजित नारायण प्रसाद, सदस्य सचिव (झालसा) कुमारी रंजना अस्थाना एवं न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष (डालसा) रांची, अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में सचिव राकेश रौशन ने अविलंब संज्ञान लिया। डालसा की टीम ने तत्काल बच्ची का रेस्क्यू किया और हेड क्वार्टर डीएसपी-2 अमर कुमार पांडे व टाटीसिल्वे थाना प्रभारी से समन्वय स्थापित कर पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई। वर्तमान में बच्ची को चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, बच्ची की आगे पढ़ने की इच्छा को देखते हुए डालसा द्वारा उसे कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में नामांकित और आवासित कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

