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संथाली भाषा और ओल चिकी लिपि को सरकारी कार्यालयों में मान्यता दिलाने की मांग तेज

रिपोर्ट : कल्याण पात्र

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चाण्डिल : ईचागढ़ में संथाली भाषा और उसकी लिपि ओल चिकी को सरकारी कार्यालयों के नामपट्टों में शामिल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। इस संबंध में संथाल समुदाय की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों ने मंगलवार, 18 मार्च 2025 को प्रखंड विकास कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। हालाँकि बीडीओ की अनुपस्थिति के कारण ज्ञापन उच्च श्रेणी क्लर्क (बड़ा बाबू) को सौंपा गया ।‌ ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि ईचागढ़ प्रखंड झारखंड के पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है जहां संथाल समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। संथाली भाषा की अपनी स्वतंत्र लिपि ओल चिकी है, जिसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त है। झारखंड सरकार के पूर्व के आदेशों के अनुसार संथाल बहुल क्षेत्रों में सरकारी कार्यालयों और गांवों के नामपट्टों पर ओल चिकी लिपि में अंकन किया जाना चाहिए। इससे पहले भी इन मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था । ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधियों ने आशा जताई कि इस बार प्रशासन इस मांग को गंभीरता से लेंगे और जल्द से जल्द ओल चिकी लिपि में सरकारी कार्यालयों के नामपट्टों को लिखने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। ज्ञापन को सौंपने वालों में मुख्य रूप से माझी बाबा घनेश्याम मुर्मु, धनेश्वर मुर्मू, कारण किस्कू, बुद्धेश्वर किस्कू, रोड़े बेसरा, महावीर हांसदा, सरजू किस्कू, मोतीलाल मुर्मू तथा मिरू मुर्मू उपस्थित थे।

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