Jamshedpur News : आदिवासी दिवस के दिन पर्व त्यौहार का आयोजन न कर आदिवासी अधिकारों के प्रति जागरूकता कार्यक्रम करे : दीनबंधु सिंह सरदार आदिवासी एकता मंच, झारखंड के अध्यक्ष दीनबंधु सिंह सरदार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्व आदिवासी दिवस को आदिवासियों के अधिकारों के प्रति अपने लोगों को जागरूकता के लिए कार्यक्रम करने के लिए आह्वान किया. उन्होंने आगे कहाँ कि झारखंड सरकार 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस को सरकारी संस्थाओं में अवकाश का घोषणा किया है. किसी भी दिवस या दिन को इसलिए छुट्टी दिया जाता है ताकि जिनके या जिस मकसद के लिए छुट्टी दिया जाता है उसका सार्थकता बने रहे. लेकिन उसदिन होता क्या है? हमलोग ग्रामीण क्षेत्रों में देखते हैं कि इस दिवस को पिछले साल से फुटबॉल खेल और मुर्गा लड़ाई और मेला का आयोजन किया जा रहा है. इन सबका आदिवासी संस्कृति में अपना एक समय और स्थान है. उन्होंने कहाँ की आदिवासी दिवस के दिन को इसके लिए न चुना जाए. अगर कुछ कार्यक्रम करना ही है तो इस दिवस को आदिवासियों के अस्तित्व रक्षा के लिए इतने सारे जो कानून बना है उसके प्रति लोगों में जागरूकता है के लिए सभा सम्मेलन करे. वनाधिकार कानून को जन जन तक पहुचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए. आदिवासियों के स्वतंत्र पहचान के लिए आदिवासी/सरना धर्म कोड लिए किए जा रहे कार्यक्रमों में शामिल होइए.

ByVananchal 24 TV Live

Jul 15, 2022
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आदिवासी दिवस के दिन

पर्व त्यौहार का आयोजन

न कर आदिवासी

अधिकारों के प्रति

जागरूकता कार्यक्रम करे :

दीनबंधु सिंह सरदार

जमशेदपुर ( योगेश  मिश्रा)  आदिवासी एकता मंच, झारखंड के अध्यक्ष दीनबंधु सिंह सरदार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्व आदिवासी दिवस को आदिवासियों के अधिकारों के प्रति अपने लोगों को जागरूकता के लिए कार्यक्रम करने के लिए आह्वान किया.

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उन्होंने आगे कहाँ कि झारखंड सरकार 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस को सरकारी संस्थाओं में अवकाश का घोषणा किया है. किसी भी दिवस या दिन को इसलिए छुट्टी दिया जाता है ताकि जिनके या जिस मकसद के लिए छुट्टी दिया जाता है उसका सार्थकता बने रहे.

लेकिन उसदिन होता क्या है? हमलोग ग्रामीण क्षेत्रों में देखते हैं कि इस दिवस को पिछले साल से फुटबॉल खेल और मुर्गा लड़ाई और मेला का आयोजन किया जा रहा है. इन सबका आदिवासी संस्कृति में अपना एक समय और स्थान है. उन्होंने कहाँ की आदिवासी दिवस के दिन को इसके लिए न चुना जाए.

अगर कुछ कार्यक्रम करना ही है तो इस दिवस को आदिवासियों के अस्तित्व रक्षा के लिए इतने सारे जो कानून बना है उसके प्रति लोगों में जागरूकता है के लिए सभा सम्मेलन करे. वनाधिकार कानून को जन जन तक पहुचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए. आदिवासियों के स्वतंत्र पहचान के लिए आदिवासी/सरना धर्म कोड लिए किए जा रहे कार्यक्रमों में शामिल होइए.