
वन विभाग पर पक्षपात का आरोप — ‘रन फॉर गजराज’ में स्थानीय मुखिया व ग्राम प्रधानों की उपेक्षा से ग्रामीणों में रोष

चांडिल संवाददाता की रिपोर्ट
चांडिल । दलमा तराई क्षेत्र में वन्य प्राणियों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित ‘रन फॉर गजराज’ दलमा मैराथन को लेकर वन विभाग पर पक्षपात और भेदभाव के गंभीर आरोप लगे हैं। भादुडीह पंचायत के मुखिया बुड्ढेश्वर बेसरा ने चाकुलिया मोड़ स्थित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वन विभाग ने कार्यक्रम आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा की है। दलमा इको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आने वाले पंचायतों के मुखिया और ग्राम प्रधानों को आमंत्रित तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के आदिवासी मुखियाओं के साथ सीधी भेदभावपूर्ण नीति है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन विभाग की मनमानी के खिलाफ जल्द ही आदिवासी और स्थानीय ग्रामीण आंदोलन की राह पकड़ेंगे।वन्य प्राणी सप्ताह (2 से 8 अक्टूबर) के अवसर पर झारखंड सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा टाटा स्टील जियोलॉजिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को दलमा क्षेत्र में 16 किलोमीटर लंबी ‘रन फॉर गजराज’ मैराथन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक सविता महतो एवं उपायुक्त नितीश कुमार सिंह ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए किया। मौके पर डीएफओ सबा आलम अंसारी, रेंजर दिनेश चंद्रा और शशी रंजन प्रकाश सहित कई अधिकारी मौजूद थे। झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और बंगाल से 4200 धावकों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। मैराथन के परिणामों में उत्तर प्रदेश के धावकों का दबदबा देखने को मिला। महिला वर्ग में अंशिका पटेल प्रथम, वंदना द्वितीय, बबिता कुमारी तृतीय, पूनम निषाद चतुर्थ और अंजलि पटेल पंचम स्थान पर रहीं, जबकि पुरुष वर्ग में रवि कुमार पाल (लखनऊ) प्रथम, रोहित सरोज द्वितीय, अक्षय कुमार तृतीय, गणेश कुमार चतुर्थ, मुकेश कुमार (राजस्थान) पंचम, अक्ष कुमार (मेरठ) षष्ठम और झारखंड के बबलू सिंह सप्तम स्थान पर रहे। काठजोड़ गांव के ग्राम प्रधान आनंद सिंह ने वन विभाग पर धोखाधड़ी और पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कार्यक्रम का उद्देश्य दलमा क्षेत्र के हाथियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाना था, तो इसमें चांडिल, नीमडीह, बोड़ाम और पटमदा प्रखंडों के स्थानीय प्रतिभागियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा बाहरी राज्यों के प्रतिभागियों को प्राथमिकता देना और उन्हें विजेता घोषित करना स्थानीय प्रतिभाओं के साथ अन्याय है। ग्राम प्रधान ने चेतावनी दी कि वन विभाग की इस दोहरी नीति के खिलाफ स्थानीय लोग आंदोलन करेंगे। दलमा रेंजर दिनेश चंद्रा से इस संबंध में दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई, किंतु संपर्क नहीं हो सका।

