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कुड़मी को ST दर्जा देने की कोशिश हुई तो झारखंड में मचेगा संग्राम – आदिवासियों की ‘आक्रोश महारैली’ में गूंजा चेतावनी का स्वर

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संवाददाता : जगबंधु महतो

गम्हरिया। झारखंड में कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के विरोध में सोमवार को गम्हरिया प्रखंड में आदिवासी समुदाय की विशाल “आक्रोश महारैली” निकाली गई। संगठन के अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू (माझी परगना) के नेतृत्व में हजारों की संख्या में पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी पुरुष, महिलाएं और युवा ऊषा मोड़ स्थित सरना उमुल से गम्हरिया प्रखंड मुख्यालय तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे।
रैली में “एक तीर, एक कमान — सभी आदिवासी एक समान” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के किसी भी प्रस्ताव को तुरंत खारिज किया जाए।
नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कुड़मी को ST दर्जा देने की कोशिश की, तो झारखंड में बड़ा आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति एक जन्मजात पहचान है, जिसकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और अधिकार हैं। इसके दायरे को बढ़ाने से मौजूदा जनजातियों के अधिकार, आरक्षण और पहचान पर खतरा मंडराने लगेगा। इस रैली में पचास से अधिक गांवों के प्रतिनिधि, महिला मंडल और युवा संगठन के सदस्य शामिल हुए। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और तीर-धनुष से सजे इस जनसैलाब ने सरकार को साफ संदेश दिया — “हमारी पहचान से समझौता नहीं होगा।”

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