
स्थानीय लोगों के द्वारा लगाया गया विभागीय मिलीभगत पर गंभीर आरोप

चांडिल : दलमा इको सेंसेटिव जोन के दायरे में पर्यावरणीय नियमों को खुलेआम ताक पर रखकर अवैध स्पंज आयरन, मिनी क्रशर मशीन तथा मैग्नेट प्रोसेसिंग का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। इको सेंसेटिव जोन में किसी भी प्रकार के औद्योगिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध होने के बावजूद अवैध कारोबार बेखौफ संचालित हो रहा है। सूत्रों के अनुसार रामगढ़ के पास एनएच-33 से लगभग 100 मीटर दूर एक अवैध मैग्नेट यूनिट धड़ल्ले से काम कर रही है। वहीं बिरीगोड़ा हड्डी गोदाम के विपरीत तरफ इको सेंसेटिव क्षेत्र में जंगल से सटे स्पंज आयरन क्रशर सहित दर्जनों छोटी-बड़ी कंपनियां पूरी तरह सक्रिय हैं। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि एक ऊंची चारदीवारी के भीतर भारी वाहनों से स्पंज आयरन उतारने और प्रसंस्करण का काम तेज गति से चल रहा था। मुख्य गेट पर प्रदर्शित जानकारी के अनुसार इस संचालन का लिंक भारत मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है।
इसके अलावा एनएच-33 के कान्दरबेड़ा पुनर्वास मोड़ के सामने टाटा हितियारी (पोकोले) शॉक्स के बगल में भी बड़े पैमाने पर स्पंज आयरन का डंपिंग कर अवैध टाल चलाए जाने की पुष्टि हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन गतिविधियों से दलमा इको सेंसेटिव जोन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है और वन, पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण विभाग की मौन सहमति के बिना यह संभव नहीं है । इंटक के चांडिल प्रखंड अध्यक्ष गुरुचरण कर्माकर ने कहा कि एक तरफ सरकार प्रदूषण मुक्त बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर छोटे-बड़े उद्योग बिना किसी रोक-टोक के प्रदूषण फैलाने में लगे हैं। यदि विभाग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो हम उग्र जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।
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