
भोगनाडीह में आदिवासी आयोजनों पर अघोषित पाबंदी का आरोप, चंपई सोरेन का सरकार पर तीखा हमला कहा— हूल दिवस पर देशभर से जुटेंगे लाखों आदिवासी, रोक सको तो रोक लो

रिपोर्टर – जगबंधु महतो
सरायकेला । जिले के महुलडीह स्थित अपने निजी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला विधायक चंपई सोरेन ने साहिबगंज जिले के भोगनाडीह में आदिवासी समाज से जुड़े ऐतिहासिक आयोजनों को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हूल विद्रोह की ऐतिहासिक भूमि भोगनाडीह में आज वीर सिदो-कान्हू के वंशजों को ही अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि जून 2025 में हूल दिवस के अवसर पर वीर सिदो-कान्हू हूल फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित एक पूर्णतः गैर-राजनीतिक कार्यक्रम को प्रशासन ने जानबूझकर अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा की स्वीकृति के बावजूद आधी रात में पंडाल तोड़ दिया गया, पार्क का ताला तोड़ा गया और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस का प्रयोग किया गया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम का दोष आदिवासियों और ग्रामीणों पर मढ़ते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अब 22 दिसंबर को प्रस्तावित संथाल परगना स्थापना दिवस के कार्यक्रम को भी केवल इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा दर्जनों मजिस्ट्रेट तैनात कर अव्यावहारिक और असंभव शर्तें थोपकर आयोजन को विफल करने की साजिश रची जा रही है। आयोजकों से स्वयं ट्रैफिक व्यवस्था, नशा मुक्ति अभियान और कानून-व्यवस्था संभालने जैसी शर्तें लगाई जा रही हैं।
चंपई सोरेन ने सवाल उठाया कि जब झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में आदिवासी समाज के कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न होते हैं, तो साहिबगंज के भोगनाडीह में ही प्रशासन को बार-बार समस्या क्यों नजर आती है। उन्होंने इसे अपने खिलाफ अघोषित प्रतिबंध करार देते हुए सरकार से इस विषय पर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।
अंत में चंपई सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा से लाखों आदिवासी भोगनाडीह पहुंचेंगे। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में दम है तो इस जनसैलाब को रोक कर दिखाए।
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