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मणिपुर के सीएम एन विरेन सिंह का पद से इस्तीफा

रिपोर्ट व विश्लेषण : संजय कुमार विनीत

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मणिपुर के सीएम एन विरेन सिंह ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मणिपुर के सीएम ने इंफाल में राजभवन जाकर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंपा।बीरेन सिंह थोड़ी देर पहले ही बीजेपी सांसद संबित पात्रा, मणिपुर सरकार के मंत्री और विधायकों के साथ राज्यपाल से मुलाकात करने राजभवन पहुंचे थे। इस फैसले से पहले बीरेन सिंह ने आज ही दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि अमित शाह के कहने पर यह इस्तीफा दिया गया है।

एन बीरेन सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा कि अब तक मणिपुर के लोगों की सेवा करना सम्मान की बात रही है। मैं केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं। उन्होंने समय पर कार्रवाई की, मदद की और विकास के काम किए। हर मणिपुरी के हितों की रक्षा के लिए कई परियोजनाएं भी चलाईं। मेरा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह इसी तरह काम करती रहे। दरअसल मणिपुर सीएम ने राज्य में जातीय हिंसा के बाद यह कदम उठाया है।

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 31 है और बीजेपी के पास खुद के 32 विधायक हैं। 2022 में विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद, जेडीयू के 6 में से 5 विधायक औपचारिक रूप से बीजेपी पार्टी में शामिल हो गए, जिससे असेंबली में बीजेपी के सदस्यों की संख्या 37 हो गई। इस प्रकार मणिपुर में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पास अपने दम पर बहुमत है। एनपीपी के 7 विधायकों द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद भी सरकार अस्थिर नहीं होगी। सूत्रों की माने तो बीजेपी दो दिनों में नये सीएम की घोषणा कर देगी।

मणिपुर में हिंसा लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है, सूबे में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच तनाव बढ़ने के कारण कई बार हिंसक झड़पें होती रही है‌। जिससे सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है।मैतेई और कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से जमीन, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद चल रहा है। एक समुदाय राज्य में सरकार पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाता रहा है। इसे लेकर ही बिजेपी हाईकमान ने यह कदम उठाया है, ताकि राज्य सरकार पर असंतोष दूर हो।

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