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पेसा कानून को मिली मंजूरी, ग्राम स्वशासन को नई ताकत

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आदिवासी समाज में जश्न का माहौल

चांडिल । झारखंड में ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य सरकार की मंत्रिपरिषद ने पेसा कानून को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को हुई इस अहम बैठक के बाद चांडिल समेत पूरे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। आदिवासी समाज ने इस निर्णय को अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों की बहाली की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पारित इस कानून को ग्रामसभा को वास्तविक अधिकार प्रदान करने वाला बताया जा रहा है। पेसा कानून के लागू होने से जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, उपयोग और प्रबंधन में ग्रामसभा की भूमिका निर्णायक होगी। इससे न केवल स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि आदिवासी समाज की सहभागिता भी नीति निर्धारण में बढ़ेगी।
चांडिल प्रखंड के आसानबनी गांव के ग्राम प्रधान प्रबोध उरांव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज के वर्षों पुराने संघर्ष का परिणाम है और इसके शीघ्र व प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम स्वशासन की अवधारणा को वास्तविक स्वरूप मिलेगा।
ग्रामसभा प्रतिनिधियों का मानना है कि पेसा कानून के पूर्ण रूप से लागू होने पर पारंपरिक अधिकारों को संवैधानिक मान्यता मिलेगी और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी। इस ऐतिहासिक निर्णय से झारखंड के आदिवासी समाज में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।

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