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सरायकेला : तिरुलडिह और ईचागढ़ क्षेत्र में अवैध बालू खनन और परिवहन बदस्तूर जारी…

दीपक नाग…  ✍️

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देश के किसी भी राज्य का भविष्य मूलत शासन और प्रशासन के लोगों का हाथों में होती है। शासन-प्रशासन कर्म और कर्तव्य धर्म से कमजोर है जाए तो उस राज्य की स्थिति क्या होगी है इसकी विवरण करने की जरूरत नहीं है। 

बातों को समझ ने के लिए चलिए चलाते हैं हम झारखंड राज्य के तिरुलडिह और इचागढ़ क्षेत्र में। शासन-प्रशासन कितना दुरुस्त है इसका परख करते हैं।

सरायकेला खरसावां जिले के तिरुलडिह और ईचागढ़ थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और परिवहन की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में हाइवा और ट्रैक्टर द्वारा बालू परिवहन बदस्तूर जारी है। बालु की हो रही तस्करी शासन-प्रशासन और राजनीतिक दलों को सवालों के कटघरे में खड़ा कर रहा है।

खबरों के अनुसार बालु की तस्करी पर कार्रवाई होने की सोच रखना कल्पना से परे है। बताया जाता है कि, इस प्रकार की गोरख धंधा बिना किसी सेंडिकेट का चल नही सकता है। बताया जाता है कि, सेटिंग-गेटिंग और फिक्सिंग के बदौलत ऐसी अवैध तस्करी चलाया जाता है । इधर ग्रामीणों का माने तो जिन गांवों के सड़को से सारी रात बालु भरा हुआ भारी वाहन गुजरता है वहां लोगों को रात में चैन से निद्रा नहीं हो पाती है। 

ऐसा नहीं है कि, शासन-प्रशासन ने कभी कोई कार्रवाई नहीं कि है । अवैध रूप से बालु लदा हुआ वाहन को ज़ब्त नही किया है। परंतु पूर्ण रूप से अंकुश लगाने मे कामयाब हो न सका । परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि, चंद जिम्मेदार तंत्र की लापरवाही झारखंड राज्य के संपदाओं को नष्ट कर रहा है।  दुसरी ओर राजनीति दल के लोग भी अब तक कोई सराहना कार्य नहीं कर सका है। कुछ कर पाता तो ऐसे तस्करी पर अब तक अंकुश लग गया होता।

बहरहाल, झारखंड अलग राज्य स्वर्णिम काल के सपनों को लेकर बना था, पर “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” बन कर रह गया ।

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