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डुमरिया बांकी शोल पंचायत के बोंया-टांडी में तरफ आट कोसी डुमरिया की ओर से सरहुल हादी बोंगा का आयोजन किया गया।

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पोटका संवाददाता -अभिजीत सेन

डुमरिया प्रखंड अंतर्गत बांकीशोल पंचायत के मुड़ा कांजिया ढिशुम जायरा बोंया टांडी में तरफ आटकोसी आदिवासी भूमिज समाज डुमरिया के द्वारा ढिशुम हादी बोंगा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में सर्वप्रथम तरफ आट कोसी के नाया विजय सरदार, देवरी कोंदा सरदार, सहयोगी में नाया अमर सिंह सरदार, देवरी सुखमहण सरदार, नाया गणेश सरदार, देवरी शिवनाथ सरदार, के संयुक्त तत्वाधान में अपने पारंपरिक विधि विधान के साथ बोंया टांडी डूंगरी में साल वृक्ष के नीचे हादी सरहुल पूजा का आयोजन किया गया । इसमें तरफ आट कोसी के साथ-साथ संपूर्ण झारखंड ढिशुम में सुख शांति एवं समृद्धि की कामना के लिए यह पूजा का आयोजन हुआ। इस हादी सरहुल पर्व में अतिथि के रूप में सिद्धेश्वर सरदार ,विभीषण, हरीश भूमिज एवं जयपाल सिंह सरदार एवं अन्य उपस्थित रहे। यह हादी बोंगा प्रकृति के गोद में समस्त जीव- जंतुओं की सुख, समृद्धि, अच्छी फसल ,अच्छी बारिश, और बुनियादी प्राकृतिक संस्कृति को प्रतिष्ठित कर ,आज के आधुनिक युग में युवा पीढ़ी को, हस्तांतरित करने के लिए यह पूजा- पाठ से जुड़ा हुआ सामूहिक संस्कृति को बनाए रखने का अवसर होता है। ईस लिए यह हादी पूजा-पाठ प्रत्येक वर्ष धान बुनाई के पहले किया जाता है। इस पूजा के बाद हर किसान अपने अपने खेतों में बीज डालने के लिए बाबा मूट बोंगा करते हैं। इस कार्यक्रम में हादी बोंगा के नाया एवं देवरी को सामूहिक रूप से नित्य -गीत एवं गाजे बाजे के साथ स्वागत किया गया। जीसके पश्चात अखाड़ा में उपस्थित विभिन्न संस्कृति टीमों के द्वारा अपनी अपने पारंपरिक वेशभूषा एवं विद दिरी साड़ी के झलक में हादी सुसुन का आयोजन हुआ। जिसमें दर्शकों का मन मुग्ध कर दिया। इसमें बच्चे बूढ़े नौजवान सभी झूम उठे। जीसके पश्चात आयोजन समिति ने सांत्वना पुरस्कार देकर सभी नित्य टीमों को सम्मानित किया और हर साल ईस तरह का योगदान की संभावना के साथ धूमधाम से हादी सरहुल पर्व मनाया गया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष बुद्धेश्वर सरदार ,सचिव दारा सिंह सरदार, कोषाध्यक्ष प्रसाद सरदार, संवाद सूत्र उपेंद्र सरदार, ज्योति सिंह सरदार जयराम सरदार, धीरेंद्र सरदार, बाबूलाल सरदार, काजमान सिंह सरदार, हरिमोहन सरदार बसंती सरदार ,सुशीला सरदार ,सुमित्रा सरदार, शक्तिपद सरदार, शिवा सरदार रूपाली सरदार पिंकी सरदार आदि के साथ बड़ी संख्या में भूमिज समाज के लोग उपस्थित रहे।