
प्रकृति, संस्कृति और अस्तित्व का महापर्व सरहुल एकता, आस्था और पहचान का प्रतीक: अमृत चिराग तिर्की

सिमडेगा संवाददाता -अर्जुन प्रमाणिक
सिमडेगा:-प्रकृति की आराधना और आदिवासी संस्कृति के महान पर्व सरहुल के पावन अवसर पर भारत आदिवासी पार्टी, सिमडेगा के जिला अध्यक्ष अमृत चिराग तिर्की ने जिलेवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े हमारे अस्तित्व, परंपरा और पहचान का जीवंत प्रतीक है।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि जब साल वृक्षों में नए फूल खिलते हैं, तब सरहुल का आगमन हमें प्रकृति के साथ हमारे अटूट रिश्ते की याद दिलाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के संरक्षक हैं, उपभोक्ता नहीं। सरहुल की यह भावना आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो जाती है, जब पर्यावरण संरक्षण एक वैश्विक चिंता बन चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि यह पर्व सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा और सामुदायिक जीवन के मूल्यों को मजबूत करता है। गांव-समाज की सामूहिक भागीदारी, पारंपरिक रीति-रिवाज और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। जिला अध्यक्ष ने सभी जिलेवासियों से अपील की कि वे इस सरहुल पर्व को शांति, सौहार्द और उल्लास के साथ मनाएं तथा अपनी संस्कृति और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक संजोकर रखें।

