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चैत्र पर्व पारंपरिक घट पाट अनुष्ठान: सतयुग के प्रतीक स्वरूप

लाया गया जात्रा घट……

सरायकेला। सरायकेला की प्रसिद्ध चैत्र पर्व के अवसर पर चड़क पूजा एवं घट पाट परंपरा के तहत रविवार की देर रात्रि जात्रा घट का आगमन हुआ। सतयुग के प्रतीक स्वरूप लाए गए उक्त जात्रा घट का शुभारंभ माजना घाट से किया गया। इससे पूर्व मल गडा गाड़ी परंपरा करते हुए पाट भोक्ता द्वारा राज पैलेस स्थित रघुनाथ मंदिर के समीप कांटो की शैय्या पर खाली बदन लोटा गया।

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इस दौरान महा रूद्र महादेव और काशी रे विश्वनाथ के जयकारे भोक्ताओं द्वारा लगाए गए। दलित समाज के भोक्ताओं द्वारा माजना घाट पहुंचे और विधि विधान के साथ जात्रा घट खरकाई नदी के पवित्र जल के साथ उठाया गया। और शिव शक्ति तांडव एवं अर्धनारीश्वर जैसे सतयुग नृत्य के साथ भक्ति भाव से जात्रा घट को डेली मार्केट स्थित प्राचीन शिवालय के प्रांगण में लाया गया। जहां विधि विधान के साथ जात्रा घट की स्थापना की गई।

मान्यता रही है कि जात्रा घाट के आगमन के पश्चात ही चैत्र पर्व छऊ महोत्सव का शुभारंभ होता है। वर्तमान के कोविड संकटकाल को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सभी गाइडलाइनों का पालन करते हुए चैत्र पर्व के पारंपरिक अनुष्ठानों का पालन किया जा रहा है। इसके तहत सोमवार 11 अप्रैल की रात्रि को वृंदावनी घट लाया जाएगा।

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