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साप्ताहिक श्रीरामचरितमानस कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन

बालकांड पर हुआ भक्तिमय प्रवचन…..

सरायकेला।  सरायकेला स्थित बजरंग चौक पर आयोजित किया जा रहे सप्ताहिक श्रीरामचरितमानस कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन वृंदावन धाम से पधारे स्वामी अनुपानंद जी महाराज ने श्रीराम कथा बालकांड के विभिन्न चरित्रों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि

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“बिनु सत्संग विवेक ना होई। राम कृपा बिनु सुलभ ना सोई।”
“सत्संगत मुद मंगल मूला। सोयी फल सिधी सब साधन फूला।।”

अर्थात सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्रीरामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं। सत्संगती आनंद और कल्याण की जड़ है। सत्संग की सिद्धि ही फल है और सब साधन तो फूल हैं।

उन्होंने कहा कि मनुष्यों में एक आदत है कि वो हर वस्तु को अपने तरीक़े से देखते हैं। यह चौपाई भी कुछ ऐसी है, क्यूँकि जैसे कहते हैं कि जितनी मान्यताएँ उतने रास्ते, वैसे ही जितनी व्यक्ति उतनी ही तरह की सोच। अगर स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो ‘सत्संग’ का अर्थ है अच्छे लोगों का संग किंतु सनातन धर्म में सत्संग के मायने इससे कहीं और अधिक हैं चूँकि अच्छे के मतलब इस संसार में अलग अलग हैं ।

उदाहरण के लिए कुछ लोग सोचते हैं कि जो मेरा हित करे वो अच्छा है और जो अहित करे वो बुरा है। ज़रा सोचिए की अगर कोई मदिरापान करने को ही अपना हित समझे तो जो व्यक्ति उसे मदिरापान करने के लिए कहे और उसकी सहायता करे वो अच्छा है और जो उसे मदिरापान से दूर रखे वो बुरा है। अगर हम इसे ऊपर दे गयी चौपाई के तौर पर देखे तो इसके मायने ही बदल जाते हैं। इसलिए सनातन धर्म में जो ‘सत्संग’ का अर्थ देखने को मिलता है वो है ‘संतों का संग’ । ऐसा इसलिए क्यूँकि संत अथाह ज्ञान का भंडार होते हैं और हमेशा मनुष्य को परमात्मा के रास्ते पर ले जाने का प्रयास करते हैं। वो अपने ज्ञान का उपभोग हमेशा मनुष्य की भलाई के लिए करते हैं और उनका संग अगर मिल जाए तो ही हमें ऐसा विवेक मिल सकता है कि हम सत्य और मिथ्या में अंतर कर सके।

ज्ञान और अज्ञान को उनकी तार्किक दृष्टि से देख सकें। पर संतों का संग भी आसानी से नहीं मिलता। जैसे कहा जाता है कि भगवान की मर्ज़ी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। वैसे ही परमात्मा की मर्ज़ी के बिना सत्संग नहीं मिलता। आनंद और कल्याण का एकमात्र रास्ता केवल सत्संग है। जिसकी सिद्धि केवल भगवान की कृपा से ही हो सकती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम संतों का सम्मान करें। ताकि उनकी कृपा हमें मिल सके।

श्रीराम कथा में सरायकेला नगर पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी सहित काफी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित रहे। आयोजनकर्ता में अजय साहू, आलोक साहू, चिरंजीवी (कोल्हू) महापात्र, त्रिलोचन महतो, दुःखु राम साहू इत्यादि रहे।