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डायन का आरोप लगाकर गांव से निकाला; परिवार परामर्श केंद्र पहुंचकर पीड़िता ने ली पद्मश्री छुटनी महतो की शरण…

सरायकेला:संजय मिश्रा

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सरायकेला। हाईटेक हो रहे देश में अभी भी ग्रामीण इलाकों में रूढ़िवादी मान्यताओं के बीच डायन कुप्रथा जारी है। पूर्वी सिंहभूम के हेंसलबील की रहने वाली छीता हांसदा ने परिवार परामर्श केंद्र शाखा कार्यालय बीरबांस पहुंचकर डायन कुप्रथा के खिलाफ संघर्ष कर रही पद्मश्री छुटनी महतो शरण लेते हुए आवेदन देकर अपनी आपबीती सुनाई है।

जिसमें उन्होंने बताया है कि बीते 31 अगस्त की रात्रि गांव के ही बाबलू मुर्मू, सनातन मुर्मू, सोमनाथ मुर्मू, पिटी मुर्मू एवं संजय मुर्मू घर आकर डायन कहकर मारपीट करने लगे। और घसीटते हुए सड़क पर ले गए। बचाने आए बच्चे, पति और देवर के साथ भी उन लोगों ने मारपीट की। कारण बताया गया कि बाबलू मुर्मू की पुत्री लक्ष्मी मुर्मू का तबीयत खराब था और उन लोगों का कहना था कि छीता ने डायन विद्या कर उसकी तबीयत खराब कर दी है।

इसे लेकर उन लोगों ने छीता को गांव छोड़ने की चेतावनी दी। इसके बाद वह न्याय के लिए पद्मश्री छुटनी महतो की शरण में परिवार परामर्श केंद्र पहुंची। पद्मश्री छुटनी महतो ने कही कि आज के समय में भी डायन कुप्रथा का हवाला देकर प्रताड़ित किया जाना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छीता को न्याय दिलाने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगी।