
उषा मार्टिन में क्वालिटी एजुकेशन पर शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम

रांची । भाषा के माध्यम से कल्पनाशक्ति और सृजनशीलता का विकास होता है, जो छात्रों में गहन विषय-वस्तु की समझ और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है। यह बातें प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. उर्वशी ने कहीं। वे उषा मार्टिन फाउंडेशन द्वारा आयोजित शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रही थीं। कार्यक्रम का विषय था – “शिक्षा में साहित्य की भूमिका और सृजन एवं संवेदनशीलता के साथ अध्यापन”।
इस अवसर पर नामकुम, अनगड़ा और कांके प्रखंड के 25 से अधिक सरकारी, गैर-सरकारी और एकल विद्यालयों के शिक्षक शामिल हुए।
डॉ. उर्वशी ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को सवाल पूछने और उत्तर लिखने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक स्कूल में ‘रचना संसार’ नाम से एक कोना होना चाहिए, जहाँ बच्चे अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन कर सकें। संवाद लेखन, नाटक मंचन और पात्र निर्माण जैसे आयोजनों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल आदेशात्मक नहीं, बल्कि ज्ञान-सम्पन्न मार्गदर्शक की होनी चाहिए।
उषा मार्टिन के महाप्रबंधक डॉ. मयंक मुरारी ने कहा कि अध्यापन एक गौरवपूर्ण कार्य है और इसे संवेदनशीलता के साथ जोड़ने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्कूलों में सीमित संसाधनों के बावजूद अपार संभावनाएं हैं। माताओं, बच्चों और शिक्षकों के बीच संवाद को बढ़ावा देना होगा और हर बच्चे में पढ़ने की रुचि विकसित करनी होगी।
कार्यक्रम में विचार व्यक्त करने वालों में टाटीसिलवे हाई स्कूल के प्राचार्य कमल कुमार सिंह, स्वर्णरेखा पब्लिक स्कूल की उप-प्राचार्य विजयलक्ष्मी टुडू, हेसल स्कूल की प्राचार्य कुमुदनी टिडू, आरा मिडिल स्कूल की प्राचार्य ललिता कच्छप समेत अन्य कई शिक्षक उपस्थित थे।
फाउंडेशन की ओर से मोनीत बूतकुमार, मेवालाल महतो, संगीता कुमारी, वरुण कुमार आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

