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खरसावां में एक शाम शिव शंकर के नाम मुशायरा सह कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन; श्रोताओं ने शेरो शायरी का लिया भरपूर आनंद।

तुम खुदा थे या कि ईश्वर फिर भी ठीक था‐‐‐

सरायकेला – संजय मिश्रा । खरसावां के आदिवासी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक शाम शिव शंकर के नाम मुशायरा सह कवि सम्मेलन कार्यक्रम में अपनी कविता सुनाते हुए बिहार के सीतामढ़ी जिले के प्रसिद्ध कवि शिव शंकर ने कहा – तुम खुदा थे या कि ईश्वर फिर भी ठीक था, ट्रेजिक है तेरा हिंदू या मुसलमां हो जाना, इंसानियत की डगर पर चलना बहुत मुश्किल, बहुत आसान है लेकिन यहां भगवान हो जाना‐‐‐। उन्होंने कहा कि आज के इस आधुनिक युग में गुरु शिष्य की परंपरा लगभग समाप्ति की ओर है। इन परिस्थितियों में अदब की महफिल सजाकर जो हमें सम्मान देने का प्रयास किया गया वह सराहनीय है। उन्होंने इस कार्यक्रम की सफल आयोजन के लिए खरसावां बुद्धिजीवी मंच की सराहना की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक सह टाटा स्टील के खेल प्रबंधक जनाब हसन इमाम मलिक ने कहा कि अगर मीडिया आज अदब और संस्कृति पर फोकस करे तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। कार्यक्रम की सदारत करते हुए करीम सिटी के प्रोफ़ेसर प्रसिद्ध शायर अहमद बद्र ने महफिल को इन अल्फाजों से नवाजा- हमने फूंका जो आशियाने को, तब मिली रौशनी जमाने को‐‐‐। इस दौरान प्रसिद्ध शायर अनवर अदीब, रिजवान औरंगाबादी, गौहर अजीज, सद्दाम गनी, शफीउल्लाह शफी, रणविजय सिंह, अनीस जमाल, अय्यूब गौहर, उमा कुमारी, दानिश हम्माद, मनोज सोय ने अपनी-अपनी शायरी एवं कविताओं से महफिल की रौनक बढ़ाई। साथ ही कविताओं और शेरो शायरी का श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। अतिथियों में प्रशिक्षु डीएसपी अकरम रजा, खरसावां के प्रखंड प्रमुख मनेन्द्र जामुदा, मुखिया मंगल सिंह जामुदा, मौलाना मो. मेराजुद्दीन, सेराज खान, सैय्यद शमीम, मो. अशफाक, अमरेश कुमार सिन्हा, मो. नसीम, अब्दुल माजिद खान सहित दर्जनों लोग मौजुद रहे। कार्यक्रम का संचालन करीम सिटी कॉलेज के प्रोफेसर गौहर अजीज एवं शीन अनवर ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन मोहम्मद दिलदार ने किया।

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