
देश सहित विदेशों में भी छऊ नृत्य कला के परचम लहरा चुके 65 वर्षीय सीनियर फैलोशिप विजेता छऊ गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक को मिला संगीत नाटक एकेडमी अवॉर्ड . . .
सरायकेला। छऊ नृत्य कला की धरती माने जाने वाली सोलह कलाओं की नगरी सरायकेला की खासियत रही है कि यहां के परंपरागत हर घर में एक छऊ कलाकार है या फिर छऊ का ज्ञाता या छऊ कलाप्रेमी है। इसी धरती से छऊ कला के दिग्गज कलाकारों ने छऊ नृत्य कला को विश्व पटल पर पहचान दिलाई है। जिसे भारत सरकार ने भी सर्वोच्च कला सम्मान पद्मश्री देकर छऊ नृत्य कला के आठ पुरुधाओं को सम्मानित किया है।
सरायकेला में ऐसे कई छऊ कलाकार आज भी है जिन्होंने छऊ कला के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है। उन्हीं में से एक वरिष्ठ कलाकार हैं 65 वर्षीय छऊ गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक। जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों संगीत नाटक एकेडमी अवार्ड-2019 से नवाजा गया। छऊ नृत्य कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गुरु ब्रजेंद्र पटनायक को राष्ट्रीय राष्ट्रीय संगीत नाटक अकैडमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ कल्चर से सीनियर फैलोशिप अवॉर्डी 64 वर्षीय गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक उम्र के इस पड़ाव में भी छऊ कला के उत्थान के प्रति जज्बा रखते हैं। और सरायकेला छऊ ट्रेनिंग सेंटर का संचालन करते हुए नौनिहालों में सरायकेला छऊ के परंपरागत गुणों का समावेश कर रहे हैं। जिसमें अभी वे 20 बच्चों को पूरी तरह से नि:शुल्क छऊ नृत्य कला के साथ-साथ इसके सफरनामा और गौरवपूर्ण इतिहास की भी जानकारी दे रहे हैं। गुरु पटनायक बताते हैं कि ट्रेनिंग सेंटर के संचालन का उद्देश्य नई पीढ़ी को छऊ नृत्य कला के मूल को लेकर तैयार करना है। ताकि भविष्य में इसकी पहचान बनी रहे।
जाने गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक को:-
22 सितंबर 1958 को सरायकेला के एक साधारण परिवार में जन्मे गुरु ब्रजेंद्र कुमार पटनायक ने रांची यूनिवर्सिटी से बीकॉम पास की। सरायकेला छऊ डांस कल्चर के एमिनेंट एक्स्पोनेंट रहते हुए उन्होंने वर्ष 1984 में भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ कल्चर से सीनियर स्कॉलर और वर्ष 2000 में भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर से सीनियर फैलोशिप अवार्ड प्राप्त की। 4 वर्ष की उम्र से छऊ नृत्य कला की शिक्षा हासिल करते हुए इन्होंने पद्मश्री स्वर्गीय गुरु केदारनाथ साहू से विधिवत छऊ नृत्य कला की शिक्षा ग्रहण की। कोलकाता, ओडिशा सहित भारत के अन्य भागों में और विदेश के पेरिस एवं जर्मनी में लेक्चर तथा डेमोंसट्रेशन और वर्कशॉप भी किए। देश के झारखंड, उड़ीसा, वेस्ट बंगाल, बिहार, पंजाब, हरियाणा, असम, और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में प्रसन्न करने के साथ-साथ विदेशी धरती पर डेनमार्क, पेरिस, साउथ कोरिया, इंडोनेशिया, रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया के वियना एवं जापान में भी इन्होंने छऊ नृत्य कला का प्रदर्शन का परचम लहराया है। स्थानीय संस्था आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा सरायकेला के सह निदेशक रंजीत आचार्य ने बताया कि संस्था के अध्यापक सह छऊ कलाकार गुरु ब्रजेंद्र पटनायक पद्मश्री शशधर आचार्य के साथ नृत्य सहयोगी होने के साथ-साथ लगभग दो दर्जन अंतरराष्ट्रीय महोत्सव और लगभग 200 राष्ट्रीय महोत्सव में सरायकेला छऊ का प्रदर्शन कर चुके हैं। साथ ही साथ राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में नृत्य गुरु का कार्य किए हैं।
