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घाटशिला : अपने लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी और अधिकारी  एक दिन का हड़ताल 

दीपक नाग …✍️

अपने लंबित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले देश के सभी राष्ट्रीय बैंक के लगभग 8 लाख अधिकारी और कर्मचारी आज 11 सितंबर को एक दिवसीय हड़ताल किया। जिसके तहत सड़कों पर शान्ति पूर्ण तरीके से मार्च किया। जिससे कि, सरकार के कानों तक उनकी आवाज पहूंच सके। इस एक दिवसीय हड़ताल से घाटशिला के राष्ट्रीय बैंक भी अछूता नहीं रहा।

निर्धारित समय पर क्षेत्र के बैंकिंग कर्मचारी बैंक के समक्ष एकत्रित हुए और हाथों में अपने मांग का पोस्टर लेकर सड़कों पर शान्ति पूर्ण तरीके से मार्च किया।

यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स की मांगें :

यूनाइटेड फोरम आफ यूनियन्स के तहत मुख्य रूप से चार मांगों को लेकर यह हड़ताल किया गया है। जिसमें पहला – सप्ताह में पांच दिनों का बैंकिंग कार्य किया जाए। दुसरा – सरकार के एक तरफ़ा और भेदभावपूर्ण फ़ैसले को रोक दिया जाए। तीसरा – यूनियन के साथ भेदभाव से परे हटकर द्विपक्षीय के ज़रिए योजना में बदलाव करें और चौथा – बची हुई समस्याओं का समाधान करें।

जानकारी के मुताबिक, आज इस एक दिवसीय हड़ताल के बाद भी संबंधित सरकार पक्षों के द्वारा संतोषजनक परिणाम नहीं निकलता है तो, इसी माह के 28, 29 और 30 सितंबर’ 2026 को तीन दिनों के लिए फिर बैंक के कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में जाने की बातें कही हैं। और इसके बाद भी मांगों पर समझौता नहीं किया गया तो आगामी 26 अक्टूबर’ 2026 से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जा सकता है।

घाटशिला मे बंद में मुख्य रूप से सुनिल कुमार नाग, नीरज अग्रवाल, वन्दना दे, सुनैना एक्का, ध्रूकुली रजक, सुशील रजक, ओम प्रकाश, बिभूती, श्यामु रजक, संजीव हेम्ब्रम, पंकज महातो, पार्थ राय, दीपचंद बाल्मिकी, अशोक बाल्मिकी, रंजन कै, डोमान मुर्मू, सुरेश हांसदा और मोतीलाल नायक उपस्थित थें।

बहरहाल, दो पक्षों के बीच चल रहा इस “टैग आफ वार” के बीच में आम व्यापारी और आदमी परेशान होना स्वाभाविक है। भविष्य ही पटकथा से पर्दा उठा सकता है कि, आने वाले समय में अंजाम क्या होगा?

 

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