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प्रथमा अष्टमी पोढ़ुआ अष्टमी पर सम्मानित किए गए ज्येष्ठ संतान…

सरायकेला-संजय मिश्रा ।

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उत्कलीय परंपरा के तहत सरायकेला सहित आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ प्रथमा अष्टमी त्यौहार मनाया गया। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाये जाने वाले प्रथमा अष्टमी पर्व मूल रूप से पोढ़ुआ अष्टमी पर्व के रूप में प्रचलित उक्त त्योहार के अवसर पर घर की माताओं द्वारा इष्ट की आराधना करते हुए अपने ज्येष्ठ संतान की सुख समृद्धि के लिए विशेष पूजा अर्चना कर अपने प्रथम ज्येष्ठ संतान का सबसे पहले सम्मान करते हुए तिलक लगाया गया।

इसके बाद नए वस्त्र देकर संतान का सम्मान किया गया। जिसके बाद प्रथम संतान को मिठाई खिलाते हुए विशेष रुप से तैयार किए गए पारंपरिक पकवान के तहत विशेष रूप से हल्दी के पत्ते में लपेटकर बनाए गए एंडुरी पीठा एवं बैंगन भाजा का भोजन कराया गया। परंपरा अनुसार प्रथम संतान के सम्मान करने के पश्चात अन्य सभी संतानों का भी समान रूप से माताओं द्वारा सम्मान किया गया। त्यौहार के पीछे प्राचीन मान्यता रही है कि प्रथमा अष्टमी पर घर के प्रथम संतान का विधि विधान के साथ सम्मान किए जाने पर घर में सुख शांति एवं समृद्धि तथा आरोग्यता बनी रहती है।

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