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विश्व खाद्य दिवस पर आईसीएआर-IIAB, रांची में किसान गोष्ठी एवं इनपुट वितरण कार्यक्रम सम्पन्न

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Arjun Kumar Pramanik…..✍️

रांची। विश्व खाद्य दिवस 2025 के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), रांची में किसान गोष्ठी एवं अनुसूचित जनजातीय किसानों के लिए इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हाथ से हाथ मिलाकर” रही, जो कृषि, विज्ञान और समाज के सामूहिक प्रयासों से सतत एवं समृद्ध भविष्य निर्माण का संदेश देती है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंत्री  शिल्पी नेहा तिर्की (कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार) थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. ए. सिद्दीकी, सचिव, तथा  गोपाल  तिवारी, संयुक्त सचिव, कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार उपस्थित थे। राज्य के विभिन्न जिलों से लगभग 1000 किसान, महिला कृषक समूह, युवा उद्यमी एवं वैज्ञानिक इस अवसर पर शामिल हुए।

अपने संबोधन में मंत्री  शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि ICAR-IIAB किसानों के विकास हेतु उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान जब मिलकर कार्य करते हैं, तभी आत्मनिर्भर और समृद्ध कृषि व्यवस्था संभव होती है। उन्होंने अनुसूचित जनजातीय किसानों के लिए इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए राज्य सरकार की किसानों के कल्याण एवं तकनीकी सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त सचिव  गोपाल तिवारी ने कहा कि कृषि और जैव प्रौद्योगिकी का सम्मिलन किसानों के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। उन्होंने ICAR-IIAB की टीम के प्रयासों की सराहना की। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. सी. दुबे ने कहा कि विज्ञान किसानों के जीवन में बदलाव ला सकता है, बशर्ते वे नई तकनीकों को अपनाएँ और फसलों में विविधता लाएँ।संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हर किसान देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा का प्रहरी है। ICAR-IIAB का लक्ष्य उन्हें सशक्त, शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। उन्होंने बताया कि संस्थान शोध के साथ-साथ नवाचारों को किसानों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत है। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने रबी फसलों की उन्नत तकनीक, प्राकृतिक खेती, बागवानी, पोल्ट्री व बतख पालन, मत्स्य पालन, राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और किसान शिकायत निवारण पोर्टल जैसे विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर अनुसूचित जनजातीय किसानों के बीच उन्नत बीज, जैव उर्वरक, पौध सामग्री एवं अन्य कृषि इनपुट्स का वितरण भी किया गया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. बिजय पाल भड़ाना के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन विश्व खाद्य दिवस की भावना को मूर्त रूप देता है, जहाँ किसान, वैज्ञानिक और नीति निर्माता “हाथ से हाथ मिलाकर” बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के निर्माण का संकल्प लेते हैं।

 

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