Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Spread the love

13 दिवसीय साधना शिविर का समापन, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements

Arjun Kumar….✍️

अनगड़ा(राँची) । प्रखंड के हेसल पंचायत अंतर्गत हेसल जारा गांव स्थित बाबा उमाकांत जी महाराज आश्रम में आयोजित 13 दिवसीय खंडित एवं अखंडित साधना शिविर का समापन हुआ। समापन अवसर पर बाबा उमाकांत जी महाराज ने ऑनलाइन माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया । बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि साधना की शुरुआत भारत भूमि से हुई और समय के साथ इसकी परंपरा आगे बढ़ती गई। वर्तमान समय में की जाने वाली साधना की परंपरा सतयुग से चली आ रही है। जीवन में साधना का महत्व बताते हुए कहा कि आचार-विचार और खान-पान में असंतुलन के कारण मनुष्य अनेक प्रकार की परेशानियों और बीमारियों से घिर रहा है। साधना जीवन में संयम और सकारात्मकता लाने का मार्ग प्रदान करती है। गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साधना के मार्ग में गुरु सबसे महत्वपूर्ण साथी होते हैं। गुरु के मार्गदर्शन और आदेश का पालन करने से सही दिशा मिलती है। आध्यात्मिक गुरु के प्रति विश्वास और निष्ठा सुनने, समझने तथा निरंतर साधना से विकसित होती है। गुरु के बताए मार्ग पर चलने से जीवन में शांति और सकारात्मक भाव का विकास होता है। प्रेम, सेवा और सदाचार को मानव जीवन का आधार बताते हुए कहा कि सच्चा प्रेम दिखावे से परे होता है। संतों का उद्देश्य जीवों को सद्मार्ग पर चलाना और जीवन को सही दिशा देना है। मानव जीवन में अहिंसा का विशेष महत्व है। किसी भी जीव की हत्या को गंभीर पाप बताते हुए समाज में शांति, सद्भाव और सेवा की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। सत्संग और सेवा के महत्व पर कहा कि सामूहिक सत्संग से लोगों में सकारात्मक भाव और विश्वास का निर्माण होता है। जीवात्मा की सेवा तथा सद्मार्ग पर चलना मानव जीवन के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है। शिविर में महिला, पुरुष, बच्चे-बच्चियों सहित बुजुर्गों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। 13 दिनों तक साधना, सत्संग और सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का नेतृत्व पंकज बेदिया एवं नितेश कुमार प्रजापति ने संयुक्त रूप से किया। भंडारे की व्यवस्था में जीतू महली एवं मंटू महतो ने सहयोग किया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने साधना शिविर के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements