















कांड्रा : अमलगम स्टील के गेट पर आश्रित परिवार का अनिश्चितकालीन धरना, अनुकंपा नौकरी की मांग
रिपोर्टर – जगबंधु महतो











@ पांच दौर की वार्ता के बाद भी नहीं निकला समाधान, मृतक कर्मचारी के पुत्र ने प्रबंधन से लगाई न्याय की गुहार
@ क्षेत्र के पक्ष और विपक्ष राजनीतिक दलों की ओर से कोई पहल नहीं
कांड्रा : सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत कांड्रा स्थित अमलगम स्टील एंड पावर लिमिटेड के मुख्य गेट के समक्ष अनुकंपा के आधार पर स्थायी रोजगार की मांग को लेकर मृतक कर्मचारी के आश्रित परिवार ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। परिवार का कहना है कि कंपनी प्रबंधन के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद अब तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
धरने पर बैठे मनीमय महतो ने बताया कि उनके पिता अशोक कुमार महतो अमलगम स्टील एंड पावर लिमिटेड में डीआरआई लैब असिस्टेंट के पद पर स्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। फरवरी 2026 में उनके आकस्मिक निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। परिवार के भरण-पोषण का कोई स्थायी साधन नहीं होने के कारण उन्होंने कंपनी प्रबंधन से अनुकंपा के आधार पर रोजगार देने की मांग रखी है।
मनीमय महतो के अनुसार, पिता के निधन के बाद से इस मांग को लेकर कंपनी प्रबंधन के साथ करीब पांच बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन प्रत्येक बार बातचीत के बावजूद कोई सकारात्मक एवं ठोस निर्णय सामने नहीं आया। इससे निराश होकर परिवार ने अब कंपनी के मुख्य गेट के समक्ष शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चित कालीन धरना शुरू किया है।
मनीमय महतो ने स्पष्ट किया कि धरने का उद्देश्य कंपनी में किसी प्रकार का व्यवधान या अशांति पैदा करना नहीं है। परिवार केवल अपनी परिस्थितियों को प्रबंधन के सामने रखते हुए न्यायसंगत समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन मानवीय एवं पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनुकंपा के आधार पर स्थायी नौकरी देने की दिशा में सकारात्मक पहल करे।
आश्रित परिवार ने प्रबंधन से जल्द वार्ता कर मामले का समाधान निकालने की अपील की है, ताकि परिवार को आर्थिक संकट से उबरने का सहारा मिल सके।
बहरहाल, खुद को समाजसेवी समझने वाले कोई राजनितिक चेहरा इस मामले को लेकर अब तक अपने स्तर से पहल करते नहीं देखा गया। जाहिर है, गरीब की लड़ाई है, खुद ही लड़ना होगा।





