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सिरूम रूपरू में 101 वर्षों से कायम है मां दुर्गा की आराधना की परंपरा, मधुश्री महतो ने किया पूजा पंडाल का उद्घाटन

 

 

रिपोर्टर — जगबंधु महतो

 

 

सिरूम रूपरू में शारदीय दुर्गोत्सव की धूम, कलश यात्रा के साथ शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान

 

 

 

चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत सिरूम रूपरू में शारदीय दुर्गा पूजा को लेकर भक्तिमय माहौल बना हुआ है। यहां श्री श्री सार्वजनिक शारदीय दुर्गा पूजा की परंपरा 101वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। एक सदी से अधिक समय से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के प्रति स्थानीय लोगों में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है।

 

पूजा के अवसर पर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो और आंदोलनकारी सुनील महतो ने संयुक्त रूप से फीता काटकर पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। इस दौरान पूजा समिति की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में दुर्गोत्सव की रौनक और बढ़ गई।

 

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है आयोजन

 

इस अवसर पर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कहा कि सिरूम रूपरू में दुर्गा पूजा की परंपरा वर्षों पुरानी है। इस वर्ष पूजा का 101वां वर्ष होना क्षेत्र के लोगों की अटूट धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। ऐसी परंपराएं समाज को एकजुट करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ने का काम करती हैं।

 

पूजा के धार्मिक अनुष्ठान के तहत सिरूम तालाब से कलश उठाकर मंदिर लाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। कलश यात्रा और पंडाल उद्घाटन के बाद पूरे क्षेत्र में मां दुर्गा की आराधना को लेकर उत्साह का माहौल बन गया। श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

 

समिति के सदस्य और ग्रामीण रहे मौजूद

 

कार्यक्रम में पूजा समिति के अध्यक्ष हेमंत सिंह सरदार, अबनी कुमार मंडल, पुरुषोत्तम महतो, मुरलीधर कुमार सहित पूजा समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने मिलकर पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ दुर्गोत्सव मनाने का संकल्प लिया।

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