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मृदा स्वास्थ्य सुधारने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर जोर, कृषि इनपुट का भी किया गया वितरण

Arjun Kumar….✍️

नामकुम(राँची) । किसानों की आय बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से आईसीएआर-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी), रांची की ओर से शुक्रवार को ‘खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) एवं जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 450 से अधिक किसान एवं महिला किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर मुख्य अतिथि तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन एल. खोबुंग विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। अतिथियों ने संस्थान परिसर स्थित एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) इकाई और प्रत्यक्ष बीजित धान (डीएसआर) प्रदर्शन इकाई का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से सीधा संवाद किया और पौधरोपण भी किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने अभियान की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026 के खरीफ एवं रबी मौसम में संचालित इस अभियान के माध्यम से 5 हजार से अधिक किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत किसानों को बैटरी चालित स्प्रेयर, सब्जी किट, सरसों, मटर एवं गेहूं के उन्नत बीज, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी सहित विभिन्न कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल से झारखंड के पांच जिलों के किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

मृदा की उर्वरता बचाने के लिए संतुलित खेती जरूरी

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से कृषि भूमि की गुणवत्ता में आ रही गिरावट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खाद और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। सरकार किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जागरूकता और जानकारी के अभाव में कई किसान इनका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य सरकार की एजेंसियों से योजनाओं एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने की अपील की।
वहीं, संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन एल. खोबुंग ने मृदा परीक्षण को टिकाऊ खेती का आधार बताते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने झारखंड में जैविक एवं प्राकृतिक खेती मिशन को भी महत्वपूर्ण बताया। योजना के प्रावधानों के तहत जैविक खेती के लिए तीन वर्ष तक 5 हजार रुपये और प्राकृतिक खेती के लिए दो वर्ष तक 4 हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता का उल्लेख किया।

धान कटाई के बाद खाली खेतों के उपयोग पर जोर

कार्यक्रम में आयोजित किसान गोष्ठी में वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की कटाई के बाद खाली पड़ी जमीन पर दलहन एवं तिलहन जैसी फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित किया। इससे फसल सघनता बढ़ाने और खेतों का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया गया। किसानों को रासायनिक खादों का सीमित एवं संतुलित उपयोग करने, गोबर की खाद और जैविक पोषक तत्व अपनाने तथा पशुओं के पौष्टिक आहार के रूप में साइलेज के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के नवनिर्मित मुख्य प्रशासनिक भवन का भी अतिथियों ने निरीक्षण किया। इस अवसर पर संस्थान के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. वी.पी. भदाना ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संयुक्त निदेशक (शिक्षा) डॉ. के.के. कृष्णानी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और बड़ी संख्या में किसानों की सहभागिता रही।

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