
मुसाबनी : प्रखंड कार्यालय परिसर में बंद पड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र का मामला डा. बालमुचू ने संभाला
दीपक नाग… ✍️
देश के सरकार हो या राज्य सरकार, आम लोगों को स्वस्थ्य रखना और चिकित्सा व्यवस्था को ठीक रखना उनकी जिम्मेदारी होती है। इसी जिम्मेदारी के बातों को लेकर मुसाब प्रखंड कार्यालय परिसर में बंद किया गया उप-स्वास्थ्य केंद्र को पूण जीवित करने के लिए लोगों ने आवाज उठाता। लोगों ने समस्या के समाधान के लिए पूर्व विधायक सह राज्य सभा सांसद रह चुके डाक्टर प्रदीप कुमार बालमुचू के समक्ष रखा।
मुसाबनी प्रखंड कार्यालय के प्रांगण में कुछ सालों पहले सरकारी उप-स्वास्थ्य केंद्र हुआ करता था। चुंकि मुसाबनी प्रखंड का भौगोलिक संरचना इस तरह है कि, स्वास्थ्य उपकेंद्र से पुरा प्रखंड के लोगों को सुविधा देना महज एक कल्पना है। प्रखंड कार्यालय के सामने बने उप-स्वास्थ्य केंद्र होने से राखा, केंदाडिह, सुरदा वगैरह – वगैरह क्षेत्र के लोगों के लिए काफी दूर हुआ करता था। न जाने झारखंड सरकार के तात्कालिक स्वस्थ्य मंत्रालय को क्या सोच में आया कि, इस उप केन्द्र को बंद कर सु्रदा ज़ाहिरगढ़ और केंदाडिह मार्ग के बीच आलिशान पीएचसी का निर्माण किया। यह कार्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुरक्षा के दृष्टि से सराहना भी की गई और होनी भी चाहिए।
पर पहले वाले उप-स्वास्थ्य केंद्र को बंद करना मुसाबनी प्रखंड के दुसरे क्षेत्र का लोगों के लिए मुसीबत हो गई। कुइरलिसुता, पारुलिया, बालियागोड़ा, बादिया, धोबोनी वगैराह – वगैरह क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी बढ़ गई। आकस्मिक जरुरत पड़ने पर सरकारी चिकित्सक का लाभ ले पाना कठीन हो गया। वर्तमान पीएचसी दुसरे छोर के वासिंदाओ के लिए काफी दूर हो गया।
इन परेशानियों से उबरने के लिए पिछले कुछ दिनों से स्थानीय लोगों ने आवाज उठाना आरंभ करने लगें। इन लोगों का सरकार से मांग है कि, मुसाबनी प्रखंड कार्यालय परिसर में बंद पड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र को पूण जीवित किया जाए।

स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर घाटशिला विधानसभा के कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक सह राज्य सभा सांसद रह चुके डाक्टर प्रदीप कुमार बालमुचू के समक्ष रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए डाक्टर प्रदीप कुमार बालमुचू ने आज 6 अक्टूबर’2026 के दिन झारखंड राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को एक आवेदन सौंपा और इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करने की आग्रह किया।
बहरहाल, स्वास्थ्य मंत्री इस बात को कितनी गंभीरता से लेकर मामले पर आगे बढ़ते हैं, यह तो समय के गर्भ में है।
