चांडिल गोलचक्कर जाहेरथान में श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया गया बाहा बोंगा महोत्सव
चांडिल दिशोम बाहा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
आदिवासियों का बाहा पर्व आस्था व प्रकृति-पूजा का प्रतीक : मंत्री रामदास सोरेन
रिपोर्टर : कल्याण पात्रो
चांडिल : मंगलवार को चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेरगाढ़ में झारखंड दिशोम बाहा (सरहुल) महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व प्रकृति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम की शुरुआत नायके बाबा द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया और सखुआ फूल (सारजोम बाहा) ग्रहण किया। महिलाओं ने इसे अपने जुड़ो में और पुरुषों ने अपने कानों पर सजाया। इस महोत्सव में बाहा गीतों की गूंज से माहौल भक्तिमय हो गया। सारजोम बाहा हो मातकोम गेले-मुलू चादो हो बाहा बोगा.. जैसे पारंपरिक गीतों से पूरा जाहेरथान गुंजायमान हो उठा। किनुडीह, जमशेदपुर की बाहा नृत्य टीम ने मनमोहक प्रस्तुति दी वहीं मांदर और नगाड़ों की थाप पर सामूहिक बाहा नृत्य ने समां बांध दिया। इस आयोजन में युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी संस्कृति एवं प्रकृति प्रेम का प्रदर्शन किया। इस महोत्सव के दौरान प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा का संकल्प लिया गया। सभी उपस्थित लोगों ने आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। महोत्सव में झारखंड सरकार के मंत्री रामदास सोरेन, ईचागढ़ विधायक सविता महतो और पारगाना रामेश्वर बेसरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में आदिवासी-मूलवासी समाज के लोग पारंपरिक परिधानों में पहुंचे। इस आयोजन को सफल बनाने में माझी बाबा तारांचंद टुडू, गुरुचरण किस्कू, चारूचांद किस्कू, दिलीप किस्कू, संतोष किस्कू, सुगी हांसदा, बैधनाथ टुडू, सुदामा हेम्ब्रम, सोनाराम मार्डी, मनीष टुडू, गुरुपद हांसदा, कासीम किस्कू, मोतीलाल दाराईबुरू हांसदा, सुमित टुडू, शिमल बेसरा, सोमाय टुडू, कलेबर हेम्ब्रम, दिनेश मुर्मु, अजय टुडू समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अहम भूमिका निभाई। बाहा बोंगा महोत्सव ने एक बार फिर आदिवासी समाज की एकता, प्रकृति प्रेम और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूती प्रदान की।
