
भागवत सनातन धर्म की कुंजी है : पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन हुआ शामल

हल्दीपोखर में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य समापन, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
पोटका संवाददाता, अभिजीत सेन

पोटका प्रखंड अंतर्गत हल्दीपोखर में बीते 20 जनवरी से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य समापन सोमवार 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। अंतिम दिन प्रसिद्ध कथावाचक उमाशंकर शुक्ल महाराज ने भागवत की आरती एवं मंगलाचरण के पश्चात देश के अमर शहीदों के जयकारे लगवाते हुए देशभक्ति भजन प्रस्तुत किया और राजा परीक्षित की कथा पूर्ण कर सुखदेव महाराज की विदाई के साथ कथा प्रसंग को विराम दिया।
अंतिम दिन का आयोजन भक्ति, ज्ञान और आस्था की पराकाष्ठा का प्रतीक बना। इस दौरान कथावाचक ने श्रीकृष्ण के गृहस्थ जीवन, स्यामंतक मणि की कथा, सुदामा चरित्र, चौबीस गुरुओं की कथा, सुखदेव जी की विदाई तथा राजा परीक्षित की मुक्ति की कथा का भावपूर्ण रसपान श्रद्धालुओं को कराया।
कृष्ण–सुदामा कथा के प्रसंग में उमाशंकर शुक्ल महाराज ने कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा का सम्मान कर यह संदेश दिया कि प्रेम, आदर और निस्वार्थ भाव धन-दौलत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं तथा संकट के समय मित्र की सहायता करना ही सच्ची मित्रता है। यह कथा समाज को निस्वार्थता, समानता, विनम्रता और मानवीय मूल्यों का संदेश देती है।
राजा परीक्षित की मुक्ति प्रसंग पर महाराज ने कहा कि मानव जीवन अनिश्चित और क्षणभंगुर है, इसलिए समय रहते ईश्वर की भक्ति, सत्संग और श्रीमद् भागवत के श्रवण से ही दुराचार एवं सांसारिक दुखों से मुक्ति संभव है।
व्यास पीठ पर विराजमान झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भागवत का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि भागवत सनातन धर्म की कुंजी है। इसमें कही गई शिक्षाओं को जीवन और समाज में उतारने की आवश्यकता है। मनुष्य नश्वर है, लेकिन उसके कर्म और कृतियां सदा जीवित रहती हैं।
भागवत कथा संचालन समिति द्वारा जानकारी दी गई कि मंगलवार को हवन एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा जिसमें अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से उपस्थित होने की अपील की गई है।
इस अवसर पर क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

