
भ्रष्टाचार, कुव्यवस्था और जन समस्याओं को लेकर फूटा जनाक्रोश

राँची/अनगड़ा। झारखंड सरकार के विभिन्न कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, प्रखंड और जिले में गिरती कानून व्यवस्था, तथा आम नागरिकों की अनदेखी होती जन समस्याओं के विरोध में मंगलवार को अनगड़ा प्रखंड मुख्यालय का घेराव कर भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया। इस अवसर पर खिजरी विधानसभा के पूर्व विधायक रामकुमार पाहान ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा “राज्य में अवैध बालू, पत्थर और कोयले का धंधा सत्ता संरक्षण में फल-फूल रहा है। प्रशासनिक मिलीभगत से प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है। सरकार न तो ग्रामीणों की सुन रही है, न ही पारदर्शिता बरत रही है। खनन माफियाओं पर कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है। जनता को धोखे में रखकर लूट की खुली छूट दी गई है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।” प्रदर्शन के मुख्य बिंदु भ्रष्टाचार, योजनाओं में लचर क्रियान्वयन, और स्थानीय स्तर पर उपेक्षित जनसमस्याओं को लेकर रहे। कार्यकर्ताओं ने प्रखंड कार्यालय का घेराव किया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं उतर रही हैं। दफ्तरों में रिश्वत के बिना कोई काम नहीं होता। अधिकारी जन समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं ले रहे हैं। विधि-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य मांगें प्रखंड कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए गिरती कानून व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। किसान, बेरोजगार युवा और महिलाओं के लिए सरकार की योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी सह युवा नेता रामसाय मुंडा ने कहा “झारखंड में आम जनता की आवाज दबाई जा रही है। गांव-देहात में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। हमारा यह आंदोलन भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-जागरण का शंखनाद है, जिसे हम गांव-गांव तक लेकर जाएंगे। यह सिर्फ शुरुआत है।” प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अनगड़ा मंडल अध्यक्ष सुनील महतो ने अंत में अपने वक्तव्य में सरकार को चेताते हुए कहा “जनता परेशान है, अधिकारी मौन हैं और सरकार बेखबर है। अब जनता चुप नहीं बैठेगी। जब तक भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं होता और विकास धरातल पर नहीं उतरता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। यह जन आंदोलन है, कोई राजनीतिक ड्रामा नहीं।”
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ, लेकिन यह स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि जनता अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर चुकी है।

