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स्वर्ण रेखा बहुउद्देशीय परियोजना कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला.खरंसवां जिला में किसानों के खेतों मे हरित क्रान्ति अब तक नही स्वर्ण रेखा बहुउद्देशीय परियोजना में करोड़ो रूपय खर्च फिर भी किसान परेशान….

डॉ0 सुनिता ने परियोजना को सौपा ज्ञापन, तीन दिनों केे अन्दर किसानों के लिए नहर में पानी छोडने की मांग…..

 

घाटशिला (दीपक नाग, झारखंड न्यूज हेड)

घाटशिला और आसपास के क्षेत्र से गुजरता हुआ स्वर्ण रेखा बहुउद्देशीय परियोजना कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरंसवा जिला मे किसानो के खेतों मे हरित क्रान्ति अब तक तो नही ला सका पर आम जनता के करोड़ो रूपय खर्च कर चुका है । यह राशि आम जनता का इस लिये कह रहा हूं, क्यों कि सरकार जनता से ही तरह-तरह के कर वसुली करके इकट्ठा करता है ।

हां, इतना तो जरूर है कि, इस विभाग से संबंधित लोग निश्चित रूप से अपने आमदनी मे “कमाई क्रान्ति” लाया है । क्षेत्र के किसानों को समय पर मौसम घोखा दे गया । इस मामले पर भाजपा नेत्री सह समाजसेवी डॉ सुनीता देबदूत सोरेन को हैंदलजुड़ी पंचायत के किसानो ने जानकारी दी कि घाटशिला प्रखंड से गुजरने वाली स्वर्ण रेखा बहुउद्देशीय परियोजना की बायी नहर में पानी ना होने के कारण कई एकड़ में सूखा पड़ा है । परिणाम स्वरूप खेती-बाड़ी मे निर्भर करने वाले किसान तबाही के कगार मे है ।


मामले की गंभीरता को समझते हुए डॉक्टर सुनीता ने मुख्य अभियंता (स्वर्णरेखा परियोजना के चीफ) संजय कुमार से मिलकर किसानों की समस्याओं को रखा और इसके अविलंब निदान करने के लिए आग्रह किया । डॉक्टर सुनीता ने कहा यह पुरा आदिवासी बहुल क्षेत्र । जिनके मुख्य जीवन निर्वाह इसी फसलों से चलता है । उन्होने, वनांचल के न्यूज ब्यूरो हेड को बताया कि, 1980 के दशक मे स्वर्ण रेखा बहुउद्देशीय परियोजना कोल्हान एक अच्छा संकल्प के साथ आरंभ किया गया था । तकनीकी के युग मे यह आज तक अपना संकल्प पुरा नही कर पाया । योजना सफल हुआ होता तो इस क्षेत्र के किसान सालो भर अनाज उगा सकते थे । इन्ही विफलता के कारण आज कई एकड़ की खेती का जमीन अपना वजूद खोता रहा है ।

किसान धान का बिचड़ा तैयार कर पानी का इंतजार कर रहे हैं । ज्ञात हो कि सावन की शुरुआत हो चुकी है और अभी तक धान की रोपाई नहीं हुई है । कुछ दिन बाद धान का बिचड़ा सूखने की कगार पर पहुंच जाएगा । पानी ना मिलने के कारण किसानों की परेशानी पर बल पड़ गए हैं । किसान अपनी साल भर की गाढ़ी कमाई को बर्बाद होते देखने को विवश हैं ।

डाक्टर सुनिता ने बताया कि, समस्याएं सुन कर परियोजना के चीफ आश्वस्त दिया कि 2 से 3 दिन में पुरी तरह से पानी नहर में पहुंच जाएगी ।

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