
घाटशिला : विधानसभा उपचुनाव तोड़ – जोड़ की राजनीति हुई सुरु…
दीपक नाग… ✍️

: जंगल में मंगल :
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के कुरुक्षेत्र में एक चीज विशेष रुप से देखी जा रही है – “जंगल में मंगल”। तलाशने में जुटी हुई है चुनावी रथ। दोनों प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल भाजपा और झामुमो के अघोषित प्रत्याशी अपने जीतने की कूंजी सिर्फ सुदूर विहड़ गांव-गंज में तलाशने में लगे हुए हैं। देख कर ऐसा लगता है जैसे उनके राजनीतिक मंगल बीहड़ों में ही छुपी हुई है, बाकी सारा क्षेत्र में मंगल होने वाला नहीं है। एक तरफ मंगल तलाशने के फिराक में कहीं ऐसा न हो कि, दुसरी तरफ अमंगल हो जाए? देखकर ऐसा लग रहा है कि बिना किसी सारथी के ही रथ भागे जा रहा है किसी अनिश्चित राह की ओर!
: तोड़ – जोड़ की राजनीति :
चुनाव के दौरान तोड़ – जोड़ की राजनीति एक आम बात होती है। राजनीति पार्टियां कभी विरोधी राजनीतिक पार्टी के किसी मजबूत कार्यकर्ता को तोड़ कर अपने में शामिल कर लेता है तो कभी दुसरे राजनीतिक दल से लताड़े गये अन्य पार्टियों में खुद शामिल हैं जाते हैं। कुछ तो ऐसे भी स्वंभू नेता होते हैं जो प्रत्येक चुनाव में यहां वहां कुदते – फांदते रहते हैं। क्या ऐसे स्वंभू नेताओं के पार्टी बदलकर आने – जाने से राजनीतिक तराजू में विशेष फर्क पड़ता होगा क्या? यह वही बेहतर बता सकते हैं जो लोग पुष्प माला या अंग वस्त्र पहनाकर अपने बैनर तले लाते हैं।
खैर राजनीति में दल बदलने जैसे घटनाएं आम बात होती है । मजे की बात तब होती है जब, किसी बड़े नेता उसके घर – मोहल्ले में आकर सम्मान के साथ उन्हें अपने पार्टी में शामिल करते हैं। जाहिर है कि इससे उसका अपने गांव में रुतबा दुगना हो जाती है। गांव वालों को क्या पता कि उसके अनुरोध से पार्टी के बड़े नेता उसे फुल के माला या अंग वस्त्र पहनाने आएं थे। इस तरह राजनीति में दो फायदे आम तौर पर होता है, “आम के आम और गुठलियों का भी दाम मिल जाता है।” सवाल उठता है ऐसे भगोड़े नेताओं से क्या राजनीतिक चुनावों में प्रत्याशीयों को कोई लाभ होता है या फिर अपने मन के संतुष्टि कि लिए करते हैं।
: झामुमो छोड़ अर्जुन मार्डी ने भाजपा का दामन थामा :

: चुनावी कुरुक्षेत्र में प्रदेश भाजपा के अनेक नेता बनाम झामुमो का सोमेश अकेले ! :



सवाल यह है कि, भाजपा में स्थानीय लीडरों की संख्या अधिक है और प्रभावशाली कैडरों में कमी है ? चार प्रखंड घाटशिला, मुसाबनी, धालभुमगढ़ और गुड़ाबांधा शामिल हैं घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में । भाजपा के चारों प्रखंड कमेटी मजबूत होता तो इतनी जल्दी भाजपा के दिग्गज नेताओं को इतनी मस्क़त नहीं करनी होती। क्यों कि, पार्टी ने अभी तक प्रत्याशि कौन है इसका पर्चा अभी तक नहीं खोला है। लगता है चारों प्रखंड कमेटी को चुनाव से पहले सबल करने का प्रयास करना चाहते होंगे।
दुसरी ओर झामुमो के अघोषित प्रत्याशी सोमेश चंद्र सोरेन अपने चारों प्रखंड कमेटी के बदौलत चुनावी रथ का रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ाते हुए तेज़ी से दौड़ने लगा है। सोमेश के लिए एक प्लस पाइंट यह है कि चारों प्रखंडों के कर्मठ सदस्यों से उनका सीधे तौर पर संपर्क है चाहे वह देहातों का हो या शहरी क्षेत्रों का क्यो न हो, झामुमो का अपना आरंभ से यह प्लस पाइंट रहा है कि, स्थानीय पार्टी के सभी नये पुराने कार्यकर्ता से सीधे संवाद होता है।
पर भाजपा अघोषित प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन के क्षेत्र में यह समस्या महसूस की जा रही है। भाजपा के चारों प्रखंड कमेटी के मजे पार्टी के कार्यकर्ताओं से उतना अधिक गहरा संपर्क नहीं दिखाई दे रही है। जिस कारण चुनावी सहयोग भाजपाइयों से कम उस स्तर पर मिलता नजर नहीं आ रहा है।
चुनाव की तारीफ प्रतिदिन एक-एक कर घटती ही जा रही है। भाजपा और झामुमो दोनों दलों ने अभी तक पार्टी का टिकट की हाई कमान ने घोषणा नहीं की है ।
: एक ही प्रयास बारम बार :
विश्वसनीय पुत्रों के अनुसार बिहड़ के किसी गांव मे एक दिन भाजपाई जाने के बाद उस गांव में झामुमो फेरा लगा देते हैं। जिस कारण एक दिन पहले जिस गांव से विश्वास जीत कर आएं थे दुसरे दिन प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल गुड़-गोबर करके आ जाते है। ऐसे ही दोनों पक्षों को कई बार एक ही गांव का दुबारा, तीसरी बार…
