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घाटशिला : एक सच्छल परिवार की बहू ने गलत जानकारी दर्ज करा कर वर्षों तक सरकारी लाल राशनकार्ड का लाभ उठाती रही ।

✍️ … दीपक नाग

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घाटशिला : घाटशिला प्रखंड के अंतर्गत भदुआ पंचायत के घटिडचबा गांव में एक सच्छल परिवार की महिला वर्षों तक अपनी असली पहचान छुपा कर अपने लाल रंग राशनकार्ड बनायी और झारखंड तथा केन्द्र सरकार के अनाजों पर हाथ साफ करती रही ।

यह बातें वर्षों बाद तब सामने आई जब किसी ने इसकी लिखित शिकायत पूर्वी सिंहभूम जिला के उपायुक्त को किया ।‌ इस शिकायत पत्र की प्रतियां घाटशिला अनुमंडल पदाधिकारी और घाटशिला के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के दफ्तरों को भी भारतीय डाक सेवा के माध्यम से भेजा गया ।

प्राप्त खबरों के अनुसार, शिकायत कर्ता अपने आवेदन में लिखा है कि, भदुआ पंचायत के घटिडुबा गांव में सुकुमार कर नाम के एक व्यक्ति के नाम से सरकारी जन वितरण प्रणाली का वितरण केंद्र है ।‌ सुकुमार कर का भाई पंकज कर की पत्नी का नाम शुभश्री कर है । शुभश्री कर ने अपने लाल रंग राशनकार्ड बनाते समय अपने पति पंकज कर का नाम नही देकर अपने पिता का नाम (कृष्णा पति) का स्तेमाल की है । आवेदन में यह भी उल्लेख है कि, शुभश्री कर एक सच्छल और सामर्थ्य परिवार की बहू है । उल्लेखनीय है कि, शुभश्री कर की राशनकार्ड संख्या – 202002362857 है और इस राशनकार्ड में कुल तीन यूनिटी का नाम दर्ज है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में भी इसी तरह की एक शिकायत शुभश्री कर के संबंध में संबंधित विभागों के पास आया था । पर विभागीय जांच ठंडे बस्ते में पड़ गया । दुबारा फिर पिछले महीने ऐसा ही शिकायत इस महिला के संबंध में उपायुक्त के कार्यलय तक पहुंचा ।‌ मामले का सत्यता की जांच के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग के पदाधिकारि ए. डी. एस. ओ. के मार्फत घाटशिला के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के दफ्तर तक आ पहुंचा ।‌ प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी महेश प्रसाद जांच में जुटी  हुई है । उन्होंने बताया कि, शीघ्र ही जांच रिपोर्ट वरिय अधिकारियों को भेज दिया जाएगा।

सच्चाई जानने के लिए जब प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी महेश प्रसाद से बातें हुई तो पता चला, शिकायत कर्ता ने अपना जो नाम लिखा है उसे खोज पाना मुश्किल है। संभवतः अपना नाम प्रकाश में न आ जाए इसलिए छद्य नाम से सच्चाई उजागर करना चाहा ! पत्रकार से आलोचना के दौरान इस बात से इंकार भी नहीं किया महेश जी ने । आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि, शुभश्री कर अपनी राशनकार्ड को दिसंबर 2024 में ही इस सुविधा से हटा चुकी है । उन्होंने यह भी कहा की जांच प्रक्रिया आरंभ कर दिया गया है । और जांच प्रतिवेदन शीघ्र ही अपने वरीय पदाधिकारी को सौंप देंगे । पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि, जांच के दौरान अगर उन पर लगी आरोप सही पाया जाता है तो आरोपित महिला जितना भी खाद्य सामग्री लाल रंग राशनकार्ड के माध्यम से जन वितरण प्रणाली के दुकान से ले रखी है आज तक वह सारे खाद्यान्न लौटाने के लिए निर्देश दी जाएगी।‌ इसके बाद भी अगर वह निर्देश का पालन नहीं करती है तो, विभागीय स्तर से उन पर सर्टिफिकेट केस किया जा सकता है ।

बहरहाल, इतना तो सरकारी दस्तावेजों से स्पष्ट है कि, खाद्य आपूर्ति विभाग का लाभ उठाने के लिए और वह भी लाल रंग के राशनकार्ड मे कुछ वास्तविक सच्चाई को उसने गुमराह की है । वर्ना अपने पति के नाम का जगह अपने पिता का नाम का स्तेमाल न की होती । जबकि वह विवाहित महिला थी, परिवार के साथ रहती है ।‌ दुसरा ध्यान देने योग्य बात यह है कि, पिछले साल दिसंबर माह में अपने राशन कार्ड को सिस्टम से डिलीट क्यों जरूरत समझी ? शायद पिछले बार 2024 में उसके खिलाफ शिकायत उसे चौकन्ना कर दिया हो ? और अपने बचाव के लिए दिसंबर 2024 माह में खुद को इस सुविधा से अलग करना महफूज़ समझी होगी ? जाहिर है दाल में कुछ काला होने का संकेत दिख रहा है । निष्ठा के साथ जांच प्रक्रिया चला तो दुध का दुध और पानी का पानी अलग हो सकता है ।

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