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जमशेदपुर : लखाईडीह के ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू को बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने किया सम्मानित

दिवाकर… ✍️

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@ ऑर्गेनिक खेती और जड़ी-बूटी पर शोध की सराहना के लिए हुए सम्मानित 

प्राकृतिक खेती और पारंपरिक औषधीय ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए लखाईडीह गांव के ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू को बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके गांव में ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा हर्बल औषधियों के संरक्षण और शोध के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए दिया गया।

इस अवसर पर ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने बताया कि लखाईडीह गांव लंबे समय से पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि उनका गांव पूरी तरह से वैद्यराजों का गांव है, जहां आज भी अधिकांश ग्रामीण आयुर्वेदिक पद्धति पर निर्भर रहकर उपचार करते हैं।

उन्होंने मंच से झारखंड के किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि लखाईडीह के पहाड़ी क्षेत्रों में सैकड़ों प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग ग्रामीण पीढ़ियों से औषधि के रूप में करते आ रहे हैं। गांव के किसानों और ग्रामीणों ने मिलकर ऑर्गेनिक खेती और जड़ी-बूटियों के संरक्षण को लेकर कई प्रयोग और शोध भी किए हैं, जिन्हें उन्होंने यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के साथ साझा किया।

ग्राम प्रधान ने बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को लखाईडीह आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि वे गांव में मौजूद जड़ी-बूटियों पर विस्तृत शोध करें, ताकि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक मान्यता मिल सके और किसानों को इसका लाभ मिल सके।

इस कार्यक्रम में बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कुलपति एस. सी. दुबे, पशु वैज्ञानिक एम. के. गुप्ता, कृषि वैज्ञानिक अरुण कुमार सहित कई वैज्ञानिक और राज्य के विभिन्न जिलों से आए किसान उपस्थित थे। सभी ने लखाईडीह गांव की पहल की सराहना करते हुए इसे प्राकृतिक खेती और आयुर्वेदिक परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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