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VANANCHAL 24 Tv Live विशेष

अलग झारखंड राज्य की मांग में शामिल हुए यहां के लोग काली स्याह खरसावां गोलीकांड से लौटे थे सकुशल…..

सरायकेला। कहा जाता है कि प्रकृति पूजक आदिवासी समाज की संस्कृति और धार्मिक शक्तियां भी जंगलों में बसती हैं। कुछ ऐसा ही मामला जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत मरांगहातु पंचायत के रुचाप गांव के समीप स्थित मनीकिर पहाड़ के बीचो बीच सोना नदी के कलकल धारा में महाशक्ति पीठ के रूप में स्थापित है। जिसका इतिहास जिले के काली स्याह घटना खरसावां गोलीकांड से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्ष 1600 ईसवी में खरसावां और कुचाई की स्थापना के साथ ही कुचाई के आदिवासी समाज मनीकिर पहाड़ से होकर बहती सोना नदी को शक्ति पीठ मानकर प्रतिवर्ष अर्धनारीश्वर महा पाउड़ी शक्ति का आह्वान करते हुए अपने घर परिवार की सुरक्षा की कामना करते आ रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि मनीकिर का शाब्दिक अर्थ हो भाषा में नदी की गहराई से है। जिसका तात्पर्य है कि आदिवासी समुदाय की आस्था सोना नदी की गहराई की महाशक्ति से उत्पन्न महा पाउड़ी है। जिनकी पूजा अर्चना करते हुए मान्यता है कि कोई भी पूरी शक्ति इस नदी को पार नहीं कर सकती है।

खरसावां गोलीकांड साक्ष्य है महाशक्ति का

आदिवासी हो समाज महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष कृष्ण चंद्र बोदरा बताते हैं कि तीनों रियासतों के आदिवासी अलग झारखंड राज्य की मांग कर रहे थे। 1 जनवरी 1948 को सत्ता का हस्तांतरण होना था। अलग झारखंड राज्य के मांग का नेतृत्व कर रहे मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के आह्वान पर तकरीबन पचास हजार की संख्या में आंदोलनकारी आदिवासी खरसावां हाट मैदान में इकट्ठा हुए थे। परंपरागत हथियारों से लैस आंदोलनकारी आदिवासियों के खानसामा में जुटी भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी से खरसावां हाट मैदान रक्तरंजित हो गया था। इस घटना में मारे गए लोगों का आज तक कोई सरकारी आंकड़ा भी नहीं है। जिसे सरायकेला खरसावां जिला प्रतिवर्ष साल के पहले दिन नव वर्ष पर खरसावां गोलीकांड शहादत दिवस के रूप में मनाता है। कृष्ण चंद्र बोदरा बताते हैं कि कुचाई के आदिवासी किसान भी अपने परंपरागत हथियारों के साथ सोना नदी के पार पहुंचे थे। और खरसावां हाट मैदान जाने से पहले कुचाई के इनके पूर्वजों द्वारा सोना नदी स्थित मनीकिर महा पाउड़ी की आराधना कर आंदोलन के लिए गए थे। गोलीकांड के दौरान आसपास से आए हुए आदिवासियों के खून से खरसावां हाट मैदान रक्तरंजित हो गया था। परंतु कुचाई से गए सभी आंदोलनकारी सही सलामत अपने परिवार के पास लौट आए।

 

महा पाउड़ी पूजा समिति के अध्यक्ष मुन्ना सोय बताते हैं कि कुचाई के आदिवासी समाज मनीकिर पहाड़ में बहती सोना नदी को शक्ति पीठ मानते हैं। और परिवार की सुखी संपन्न एवं सुरक्षा की कामना करते हैं। उन्होंने वर्तमान की हेमंत सरकार से इस शक्तिपीठ स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है। जिससे महा पाउड़ी शक्ति पीठ से जुड़े सभी 7 जातियों सहित पूरे विश्व का कल्याण संभव हो सके। साथ ही नैसर्गिक पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण किया जा सके।

 

 

 

बहरहाल मनीकिर पहाड़ से होकर बह रही सोना नदी कुचाई के आदिवासी समाज के लिए शक्ति पीठ के रूप में स्थापित है। जो खरसावां गोलीकांड का एक प्रतिबिंब भी है। वर्तमान हेमंत सरकार और राज्य के आदिवासी कल्याण एवं परिवहन मंत्री चंपाई सोरेन आदिवासियों के विकास को लेकर तथा उनके भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण और धार्मिक स्थलों का विकास किए जाने को लेकर बेहद संजीदा है। जिससे स्थानीय लोगों में उक्त क्षेत्र के पर्यटन स्थल के रूप में विकास होने की संभावना की आस लगी हुई है.

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